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सिरहाने मोबाइल रखकर सोना: क्या सच में कैंसर का खतरा है? डॉक्टर ने बताया असली स्थिति

JANVEENA by JANVEENA
February 13, 2026
in स्वास्थ्य
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सिरहाने मोबाइल रखकर सोना: क्या सच में कैंसर का खतरा है? डॉक्टर ने बताया असली स्थिति

भारत में ज्यादातर लोग सोने से पहले मोबाइल फोन स्क्रॉल करते हैं या फोन को सिरहाने के पास ही रखते हैं। यह आदत आम हो चुकी है, लेकिन क्या यह स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है?

लॉस एंजेलेस, कैलिफोर्निया के एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. मायरो फिगुरा ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में इस मुद्दे पर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सोते समय फोन को सिर के पास रखना सुरक्षित नहीं है।

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क्या मोबाइल से कैंसर हो सकता है?

डॉ. फिगुरा के मुताबिक, “फोन तब भी रेडिएशन छोड़ता है जब आप उसे इस्तेमाल नहीं कर रहे होते। यह नींद की गुणवत्ता बिगाड़ सकता है, सिरदर्द पैदा कर सकता है और लंबे समय में कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है।”

नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन

मोबाइल फोन से निकलने वाला रेडिएशन नॉन-आयोनाइजिंग होता है। यह आयोनाइजिंग रेडिएशन (जैसे सूरज की किरणें, मेडिकल इमेजिंग या रेडियोधर्मी स्रोत) की तरह सीधे डीएनए को नुकसान नहीं पहुंचाता। लेकिन इसके बावजूद इसे रेडिएशन श्रेणी में रखा गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे “इंसानों के लिए संभावित रूप से कार्सिनोजेनिक” श्रेणी में रखा है — उसी श्रेणी में कॉफी और अचार जैसी चीजें भी आती हैं।

डॉ. फिगुरा यह भी बताते हैं कि फोन चार्जिंग के दौरान ओवरहीट हो सकता है, जिससे आग लगने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इसलिए सोते समय फोन को सिर के पास रखना सुरक्षित नहीं माना जाता। उनका सुझाव है कि फोन को बिस्तर से दूर रखें, बेहतर होगा कि कमरे के दूसरी ओर रख दें। इससे नींद बेहतर होगी और लंबे समय में स्वास्थ्य पर संभावित जोखिम भी कम होंगे।

बाकी एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

कोलकाता के अपोलो कैंसर सेंटर की रेडिएशन ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. अरुंधति डे कहती हैं कि अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करता हो कि मोबाइल फोन की रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगें ब्रेन ट्यूमर या कैंसर का कारण बनती हैं।
उनका कहना है: “दुनिया भर में लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल पर अध्ययन किए जा रहे हैं, लेकिन मौजूदा आंकड़े यह नहीं बताते कि सिर के पास फोन रखकर सोने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।”

सबसे बड़ा असर नींद पर पड़ता है

डॉक्टरों के अनुसार, मोबाइल पास रखने का सबसे स्पष्ट असर नींद की गुणवत्ता पर होता है। स्मार्टफोन लगातार रोशनी, नोटिफिकेशन, अलर्ट और स्क्रीन की चमक छोड़ते रहते हैं। भले ही आप उन पर प्रतिक्रिया न दें, लेकिन दिमाग इन संकेतों को रिकॉर्ड करता रहता है। यही वजह है कि फोन पास रखने से नींद प्रभावित हो सकती है।

सलाह

यह जानकारी रिसर्च स्टडी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई आदत या स्वास्थ्य संबंधी बदलाव को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लें।

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