उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच स्थित नीम करोली बाबा से जुड़े धार्मिक स्थल देशभर के श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखते हैं। नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम में हर साल बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हालांकि, बाबा की आध्यात्मिक विरासत से जुड़े दूसरे स्थान भी हैं, जहां जाकर श्रद्धालु शांति और सुकून का अनुभव कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है भूमियाधार, जो अपने हनुमान मंदिर और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।
अगर आप दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ समय निकालकर बाबा नीम करोली के प्रमुख स्थलों के दर्शन करना चाहते हैं, तो तीन दिन की यात्रा की योजना बना सकते हैं। इस दौरान कैंची धाम और भूमियाधार के साथ आसपास के खूबसूरत पहाड़ी इलाकों को भी देखने का अवसर मिल सकता है। आइए जानते हैं दिल्ली से इस आध्यात्मिक यात्रा का पूरा रूट प्लान।
भूमियाधार क्यों है खास?
भूमियाधार उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली के आसपास स्थित एक धार्मिक स्थल है। यहां का श्री हनुमान मंदिर नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि बाबा ने यहां हनुमान मंदिर की स्थापना की थी। इस वजह से कैंची धाम आने वाले कई श्रद्धालु भूमियाधार को भी अपनी यात्रा में शामिल करते हैं।
कैंची धाम की तुलना में भूमियाधार का वातावरण अपेक्षाकृत शांत महसूस हो सकता है, हालांकि यहां भी श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। मंदिर में दर्शन करने के अलावा यहां कुछ समय प्रार्थना और ध्यान में बिताया जा सकता है। यदि आप केवल पर्यटन के बजाय बाबा से जुड़े धार्मिक स्थलों को करीब से देखना चाहते हैं, तो इस जगह को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
दिल्ली से 3 दिन में कैसे पूरी करें यात्रा?
पहला दिन: दिल्ली से भवाली या कैंची धाम क्षेत्र पहुंचें
यात्रा के पहले दिन सुबह जल्दी दिल्ली से रवाना होना बेहतर रहेगा। सड़क मार्ग से जाने वाले लोग गाजियाबाद, हापुड़, मुरादाबाद, रामपुर और हल्द्वानी होते हुए काठगोदाम तथा भवाली की ओर जा सकते हैं। इसके बाद अपने होटल या ठहरने की जगह तक पहुंचें।
दिल्ली से भवाली तक की दूरी चुने गए मार्ग के अनुसार लगभग 300 से 330 किलोमीटर हो सकती है। ट्रैफिक, सड़क की स्थिति और पहाड़ी रास्तों के कारण यात्रा में करीब 7 से 10 घंटे या उससे अधिक समय लग सकता है।
पहले दिन बहुत ज्यादा जगहों पर घूमने का कार्यक्रम न बनाएं। होटल पहुंचने के बाद आराम करें और अगले दिन की यात्रा की तैयारी कर लें। ठहरने के लिए भवाली या आसपास का क्षेत्र सुविधाजनक विकल्प हो सकता है।
दूसरा दिन: भूमियाधार और कैंची धाम में दर्शन
यात्रा का दूसरा दिन धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए रखें। सुबह नाश्ते के बाद भूमियाधार के हनुमान मंदिर पहुंचें। यहां दर्शन करने और शांत वातावरण में कुछ समय बिताने के बाद कैंची धाम के लिए रवाना हो सकते हैं।
कैंची धाम नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित है। यह नीम करोली बाबा से जुड़ा प्रसिद्ध आश्रम है, जहां हनुमान जी के दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं।
कैंची धाम में दर्शन के लिए निकलने से पहले मंदिर के मौजूदा समय और स्थानीय व्यवस्था की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा। खासकर सप्ताहांत, छुट्टियों और विशेष धार्मिक अवसरों पर भीड़ बढ़ सकती है। ऐसे समय में पार्किंग और यातायात की समस्या भी हो सकती है।
दर्शन के बाद शाम को अपने होटल लौट आएं। यदि समय और मौसम अनुकूल हो, तो भवाली के आसपास के प्राकृतिक नजारों का आनंद भी ले सकते हैं।
तीसरा दिन: अंतिम दर्शन और दिल्ली वापसी
तीसरे दिन सुबह आराम से उठकर नाश्ता करें। यदि किसी धार्मिक स्थल के दर्शन बाकी रह गए हों, तो उपलब्ध समय और वहां की व्यवस्था के अनुसार उन्हें पूरा कर सकते हैं। इसके बाद दिल्ली वापसी के लिए रवाना हो जाएं।
यदि आप कैंची धाम और भूमियाधार दोनों जगहों के दर्शन दूसरे दिन ही कर लेते हैं, तो तीसरे दिन सुबह जल्दी वापसी शुरू करना सुविधाजनक रहेगा। इससे रास्ते में ट्रैफिक और देरी की स्थिति में भी कुछ अतिरिक्त समय मिल सकता है।
ध्यान रखें कि पहाड़ी क्षेत्रों से दिल्ली लौटते समय रास्ते की परिस्थितियों के अनुसार यात्रा का समय बदल सकता है। इसलिए वापसी के दिन बहुत देर रात तक वाहन चलाने की योजना बनाने से बचें।
ट्रेन से जाना चाहते हैं तो क्या है विकल्प?
दिल्ली से सड़क मार्ग के अलावा ट्रेन से भी इस यात्रा की योजना बनाई जा सकती है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन इस क्षेत्र के लिए प्रमुख रेल संपर्क है। दिल्ली से काठगोदाम तक उपलब्ध ट्रेन के समय और टिकट की जानकारी लेकर यात्रा की योजना बनाएं।
काठगोदाम पहुंचने के बाद टैक्सी या स्थानीय वाहन से भवाली, कैंची धाम और भूमियाधार की ओर जा सकते हैं। कैंची धाम काठगोदाम से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 35 से 45 किलोमीटर के आसपास पड़ता है। वास्तविक दूरी आपके चुने हुए मार्ग और गंतव्य के अनुसार अलग हो सकती है।
ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए तीन दिन का कार्यक्रम बनाते समय आने-जाने के समय को ध्यान में रखना जरूरी है। यदि ट्रेन के पहुंचने या लौटने का समय अनुकूल नहीं है, तो धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए उपलब्ध समय कम हो सकता है।
यात्रा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- सुबह जल्दी निकलें: पहाड़ी रास्तों पर दिन के उजाले में यात्रा करना अधिक सुविधाजनक रहता है।
- भीड़ की जानकारी लें: सप्ताहांत और छुट्टियों में कैंची धाम के आसपास अधिक भीड़ हो सकती है।
- मौसम देखकर चलें: पहाड़ों में बारिश, धुंध और भूस्खलन जैसी परिस्थितियां यात्रा को प्रभावित कर सकती हैं।
- मंदिर के नियमों का पालन करें: दर्शन के समय, पार्किंग और स्थानीय व्यवस्था से जुड़े निर्देशों का ध्यान रखें।
- होटल पहले बुक करें: छुट्टियों और भीड़ वाले दिनों में ठहरने की व्यवस्था पहले से करना उपयोगी रहेगा।
- वापसी के लिए पर्याप्त समय रखें: पहाड़ी मार्गों पर यात्रा का समय अनुमान से अधिक हो सकता है।
तीन दिन में आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव
दिल्ली से कैंची धाम और भूमियाधार की यात्रा उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकती है, जो कम समय में धार्मिक स्थलों के दर्शन के साथ पहाड़ों की शांति का अनुभव करना चाहते हैं। पहले दिन यात्रा और आराम, दूसरे दिन मंदिरों के दर्शन तथा तीसरे दिन वापसी का कार्यक्रम रखने से सफर व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
यात्रा पर निकलने से पहले मौसम, सड़क की स्थिति, मंदिरों के दर्शन संबंधी निर्देश और परिवहन की उपलब्धता की जानकारी जरूर जांच लें। इससे आपकी तीन दिन की यात्रा अधिक सुविधाजनक और यादगार बन सकती है।
डिस्क्लेमर: यात्रा की दूरी और समय अनुमानित हैं। वास्तविक स्थिति ट्रैफिक, मौसम, सड़क की दशा और स्थानीय प्रतिबंधों के अनुसार बदल सकती है।




















