अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी नीति में बदलाव की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन को हथियार और खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने के मामले में वॉशिंगटन की नीति पहले जैसी ही है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि युद्ध समाप्त करने के लिए जारी प्रयासों में ठोस प्रगति नहीं होने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप गुस्से में और निराश थे। अमेरिका लगातार बढ़ती मौतों और संघर्ष के दूसरे क्षेत्रों में फैलने की आशंका को देखते हुए युद्ध का अंत चाहता है।
तीन दिवसीय दौरे पर मंगलवार को मुंबई पहुंचे रुबियो ने यूक्रेन संघर्ष, अमेरिकी रक्षा जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। उनके बयान ऐसे समय में आए हैं, जब युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों और यूक्रेन को पश्चिमी देशों से मिलने वाली सैन्य सहायता को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
यूक्रेन को हथियार देने की नीति पर क्या बोले रुबियो?
मार्को रुबियो ने उन अटकलों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका ने यूक्रेन को हथियार और खुफिया जानकारी देने की अपनी नीति में बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इस संबंध में अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
रुबियो के मुताबिक, अमेरिका की सैन्य जरूरतें व्यापक हैं और उसे दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी पड़ती है। ऐसे में रक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उनके वितरण का फैसला जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
उन्होंने बताया कि कई देश अमेरिका से इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग कर रहे हैं। ये मिसाइलें दुश्मन की ओर से दागी गई मिसाइलों को हवा में ही रोकने और नष्ट करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों में इनकी मांग काफी बढ़ गई है।
इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी का क्या है कारण?
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि किसी देश को तत्काल इंटरसेप्टर मिसाइलें उपलब्ध नहीं हो पाने का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका उसे सहायता देने से इनकार कर रहा है। अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों और दूसरे रणनीतिक क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए भी इन मिसाइलों की जरूरत होती है।
रुबियो ने स्पष्ट किया कि दुनिया भर में अमेरिकी सैन्य तैनाती काफी व्यापक है। विभिन्न देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए वायु रक्षा प्रणालियां और अन्य रक्षा उपकरण आवश्यक हैं। इसलिए, सैन्य संसाधनों के वितरण में इन जरूरतों को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यूक्रेन को जानबूझकर किसी भी तरह की सहायता से वंचित नहीं किया जा रहा है। उनके बयान का उद्देश्य उन खबरों पर स्पष्टीकरण देना था, जिनमें यूक्रेन के लिए अमेरिकी सैन्य समर्थन में बदलाव की आशंका जताई जा रही थी।
युद्ध खत्म नहीं होने से ट्रंप क्यों हैं नाराज?
रुबियो ने कहा कि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही बातचीत में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इसी वजह से राष्ट्रपति ट्रंप नाराज और निराश थे। अमेरिका का मानना है कि लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है और इसके व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव भी सामने आ सकते हैं।
युद्ध के लंबे समय तक जारी रहने से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और विभिन्न देशों के रणनीतिक हितों पर भी असर पड़ रहा है। ऐसे में अमेरिका संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहता है।
जयशंकर और यूएई के विदेश मंत्री के साथ हुई अहम बैठक
मुंबई में अपने दौरे के दौरान मार्को रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाह्यान के साथ त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और साझा प्राथमिकताओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
रुबियो मंगलवार को मुंबई पहुंचे थे, जबकि यूएई के विदेश मंत्री सोमवार शाम भारत के दो दिवसीय दौरे पर आए थे। बैठक के बाद रुबियो ने कहा कि भारतीय और अमीराती विदेश मंत्रियों के साथ क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा तथा साझा आर्थिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करना उपयोगी रहा।
एस. जयशंकर ने भी बैठक को ऊर्जा, संपर्क और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचारों के सार्थक आदान-प्रदान का अवसर बताया।
होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक तेल आपूर्ति पर चर्चा
बैठक में पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रमों के आर्थिक प्रभावों पर भी चर्चा हुई। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया में समुद्र के रास्ते होने वाली तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर तेल की कीमतों, परिवहन लागत और ऊर्जा पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा विशेष महत्व रखती है।
हूती विद्रोहियों के हमलों से बढ़ी क्षेत्रीय चिंता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब के नागरिक बुनियादी ढांचे और आर्थिक प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों को लेकर भी चिंता जताई गई। भारत ने ऐसे हमलों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नुकसानदायक बताया है।
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा परिवहन के लिहाज से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन पर हमले की खबरों ने भी तेल परिवहन की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।
कुल मिलाकर, मुंबई में हुई त्रिपक्षीय बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की स्थिरता और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात प्रमुख मुद्दे रहे। वहीं, यूक्रेन युद्ध पर रुबियो के बयान से अमेरिका ने यह संकेत दिया कि सैन्य संसाधनों की उपलब्धता संबंधी चुनौतियों के बावजूद उसकी घोषित नीति में बदलाव नहीं हुआ है।



















