कार्डियक अरेस्ट एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें व्यक्ति का दिल अचानक शरीर में खून पंप करना बंद कर सकता है। ऐसी स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर मदद मिलने और सही तरीके से सीपीआर (CPR) दिए जाने से व्यक्ति की जान बचने की संभावना बढ़ सकती है।
सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन एक आपातकालीन प्रक्रिया है, जिसमें छाती पर दबाव देकर शरीर में खून का प्रवाह बनाए रखने की कोशिश की जाती है। जरूरत पड़ने पर इसमें बचाव वाली सांसें भी दी जाती हैं। हालांकि, सीपीआर हर बेहोश व्यक्ति को नहीं देना चाहिए। इसे शुरू करने से पहले व्यक्ति की प्रतिक्रिया और सांस की स्थिति को समझना जरूरी है।
CPR कब देना चाहिए?
अगर कोई व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर जाए और आवाज देने या कंधे पर हल्के से थपथपाने पर भी प्रतिक्रिया न दे, तो उसकी सांस की जांच करें। यदि वह सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है या केवल हांफ रहा है, तो कार्डियक अरेस्ट की आशंका हो सकती है।
ऐसी स्थिति में तुरंत स्थानीय आपातकालीन सेवा को फोन करें। भारत में एम्बुलेंस सहायता के लिए 112 पर संपर्क किया जा सकता है। आसपास मौजूद किसी व्यक्ति को फोन करने और उपलब्ध होने पर AED यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर लाने के लिए कहें।
मदद आने का इंतजार करते हुए वयस्क व्यक्ति पर सीपीआर शुरू करें। अगर व्यक्ति सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, तो उसकी नब्ज जांचने में समय बर्बाद न करें, खासकर यदि आप स्वास्थ्यकर्मी नहीं हैं।
ध्यान रखें कि केवल बेहोशी का मतलब कार्डियक अरेस्ट नहीं होता। सीपीआर देने का निर्णय व्यक्ति की प्रतिक्रिया और सामान्य सांस की स्थिति के आधार पर लिया जाता है।
CPR देने का सही तरीका क्या है?
वयस्क व्यक्ति को सीपीआर देते समय इन चरणों का पालन करें।
1. आसपास की सुरक्षा जांचें: सबसे पहले सुनिश्चित करें कि घटनास्थल पर आग, बिजली, यातायात या कोई अन्य खतरा नहीं है।
2. व्यक्ति की प्रतिक्रिया देखें: उसे आवाज दें और कंधे पर हल्के से थपथपाएं। अगर वह प्रतिक्रिया नहीं देता, तो तुरंत मदद के लिए आवाज लगाएं।
3. आपातकालीन सहायता बुलाएं: किसी को 112 पर फोन करने और AED उपलब्ध कराने के लिए कहें। यदि आप अकेले हैं, तो फोन को स्पीकर पर रखकर आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करें।
4. व्यक्ति को सही स्थिति में लिटाएं: उसे पीठ के बल किसी सख्त और समतल सतह पर रखें।
5. छाती के बीचोंबीच दबाव दें: एक हथेली का निचला हिस्सा छाती के बीच में रखें और दूसरी हथेली उसके ऊपर रखें। अपनी उंगलियों को आपस में जोड़ें और बाजुओं को सीधा रखें।
6. सही गति और गहराई बनाए रखें: छाती को लगभग 5 से 6 सेंटीमीटर तक दबाएं। एक मिनट में 100 से 120 बार दबाव देने की गति रखें। प्रत्येक दबाव के बाद छाती को पूरी तरह अपनी सामान्य स्थिति में लौटने दें।
7. सीपीआर जारी रखें: जब तक व्यक्ति सामान्य रूप से सांस लेने न लगे, प्रशिक्षित मदद न पहुंच जाए या आप शारीरिक रूप से जारी रखने में असमर्थ न हों, तब तक छाती पर दबाव देते रहें। यदि AED उपलब्ध हो जाए, तो उसे चालू करें और उसके निर्देशों का पालन करें।
प्रशिक्षित व्यक्ति वयस्क पर 30 बार छाती दबाने के बाद 2 बचाव वाली सांसें दे सकता है। यदि आप बचाव वाली सांसें देने में प्रशिक्षित नहीं हैं या ऐसा करने में असमर्थ हैं, तो लगातार छाती पर दबाव देना बेहतर विकल्प है।
CPR कब नहीं देना चाहिए?
हर बेहोश व्यक्ति को सीपीआर की आवश्यकता नहीं होती। कुछ स्थितियों में छाती पर दबाव देने के बजाय दूसरे तरीके से मदद करनी चाहिए।
जब व्यक्ति सामान्य रूप से सांस ले रहा हो: यदि व्यक्ति बेहोश है, लेकिन सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो छाती पर दबाव न दें। तुरंत मेडिकल सहायता बुलाएं और सांस पर लगातार नजर रखें। जरूरत के अनुसार उसे सुरक्षित करवट वाली स्थिति में रखा जा सकता है, बशर्ते ऐसा करने में चोट बढ़ने का खतरा न हो।
जब व्यक्ति होश में हो: अगर व्यक्ति प्रतिक्रिया दे रहा है और सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो सीपीआर शुरू न करें। उसकी स्थिति का आकलन करें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता लें।
जब व्यक्ति सामान्य रूप से सांस लेने लगे: सीपीआर के दौरान यदि व्यक्ति सामान्य रूप से सांस लेने लगे और अन्य जीवन के संकेत दिखाई दें, तो छाती पर दबाव रोकें। उसकी सांस पर नजर रखें और आपातकालीन टीम के निर्देशों का पालन करें। यदि वह दोबारा सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर दे, तो सीपीआर फिर शुरू करें।
जब आसपास का वातावरण असुरक्षित हो: यदि घटनास्थल पर गंभीर खतरा है, तो पहले अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करें और सुरक्षित तरीके से सहायता बुलाएं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि व्यक्ति बेहोश है और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, तो केवल इस डर से सीपीआर रोककर न रखें कि छाती पर दबाव देने से चोट लग सकती है। ऐसी स्थिति में सीपीआर जीवनरक्षक हो सकता है।
CPR देते समय किन बातों का ध्यान रखें?
सीपीआर के दौरान सही तकनीक का पालन करना बेहद जरूरी है। छाती पर दबाव बहुत हल्का होने से पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं बन पाता, जबकि गलत जगह दबाव देने से चोट लग सकती है।
- छाती के बीचोंबीच दबाव दें, पेट या पसलियों के निचले हिस्से पर नहीं।
- दबाव देने की गति 100 से 120 प्रति मिनट रखें।
- हर दबाव के बाद छाती को पूरी तरह ऊपर आने दें।
- दबाव देने के बीच अनावश्यक रूप से लंबे अंतराल न रखें।
- AED उपलब्ध हो तो उसके वॉइस निर्देशों का पालन करें।
- यदि कोई अन्य प्रशिक्षित व्यक्ति उपलब्ध है, तो थकान से बचने के लिए लगभग हर दो मिनट में दबाव देने वाले व्यक्ति को बदल सकते हैं। बदलाव के दौरान रुकावट कम से कम रखें।
बच्चों और शिशुओं में सीपीआर की तकनीक वयस्कों से अलग होती है। इसलिए बच्चों पर वयस्कों वाली तकनीक को बिना बदलाव के लागू नहीं करना चाहिए। उनके लिए विशेष प्रशिक्षण और आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
क्या CPR देने से हर व्यक्ति की जान बच सकती है?
सीपीआर कार्डियक अरेस्ट के दौरान शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद करता है, लेकिन इससे हर व्यक्ति की जान बचने की गारंटी नहीं होती। परिणाम इस बात पर निर्भर करते हैं कि कार्डियक अरेस्ट किस कारण हुआ, सहायता कितनी जल्दी मिली और डिफिब्रिलेशन सहित आगे का इलाज कितनी जल्दी शुरू हुआ।
इसीलिए कार्डियक अरेस्ट की आशंका होने पर देरी किए बिना आपातकालीन सहायता बुलाना और सही तरीके से सीपीआर शुरू करना जरूरी है। सीपीआर का व्यावहारिक प्रशिक्षण लेने से आपात स्थिति में सही कदम उठाने का आत्मविश्वास बढ़ता है।
जरूरी सूचना: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। वास्तविक आपात स्थिति में तुरंत 112 पर संपर्क करें और आपातकालीन ऑपरेटर के निर्देशों का पालन करें।




















