जब भी हिल स्टेशन पर घूमने का प्लान बनता है तो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लोकप्रिय शहरों का नाम सबसे पहले दिमाग में आता है। लेकिन अगर आप दक्षिण भारत में किसी शांत, हरियाली से घिरे और प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर पहाड़ी शहर की तलाश में हैं, तो कोडाइकनाल आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
तमिलनाडु के पलानी हिल्स में बसा यह हिल स्टेशन अपनी झील, धुंध से ढकी पहाड़ियों, जंगलों, झरनों और खूबसूरत घाटियों के लिए जाना जाता है। इसी प्राकृतिक खूबसूरती के कारण इसे ‘Princess of Hill Stations’ यानी ‘पहाड़ों की राजकुमारी’ कहा जाता है।
यहां कोडाई लेक, कोकर्स वॉक, डॉल्फिन्स नोज, पाइन फॉरेस्ट, गूना केव्स और कई खूबसूरत झरने पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
क्यों कहा जाता है ‘Princess of Hill Stations’?
कोडाइकनाल तमिलनाडु के Palani Hills के ऊपरी हिस्से में करीब 2,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां का ठंडा मौसम, पहाड़ों पर छाई धुंध, हरे-भरे जंगल, झीलें और घाटियों के नजारे इसे दूसरे पर्यटन स्थलों से अलग बनाते हैं।
‘कोडाइकनाल’ नाम को आम तौर पर ‘जंगलों का उपहार’ अर्थ से जोड़ा जाता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता इस पहाड़ी शहर की सबसे बड़ी पहचान है।
कोडाइकनाल का इतिहास भी है खास
कोडाइकनाल के आधुनिक हिल स्टेशन के रूप में विकास की शुरुआत ब्रिटिश काल में हुई। 1845 के आसपास ब्रिटिश अधिकारियों और ईसाई मिशनरियों ने यहां बसावट और सुविधाओं के विकास में योगदान दिया। ब्रिटिश दौर में यह जगह गर्मियों की छुट्टियां बिताने के लिए पसंद की जाती थी।
हालांकि, इस क्षेत्र का इतिहास केवल ब्रिटिश काल तक सीमित नहीं माना जाता। पुराने तमिल साहित्य में भी इस इलाके से जुड़े संदर्भ मिलते हैं, जिससे इसके लंबे सांस्कृतिक इतिहास का संकेत मिलता है।
कोडाइकनाल में कहां-कहां घूम सकते हैं?
कोडाई लेक
कोडाइकनाल की पहचान उसकी खूबसूरत कोडाई लेक से भी होती है। यह शहर के बीचों-बीच स्थित मानव निर्मित झील है, जिसके आसपास पलानी हिल्स का शानदार नजारा देखने को मिलता है।
झील के आसपास घूमना, प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेना और शांत समय बिताना पर्यटकों को काफी पसंद आता है।
कोकर्स वॉक
अगर आपको पहाड़ों के बीच पैदल घूमना पसंद है तो कोकर्स वॉक जरूर जाना चाहिए। यह करीब एक किलोमीटर लंबा वॉकिंग ट्रैक है, जो पहाड़ी किनारे से होकर गुजरता है।
इसे 19वीं सदी में लेफ्टिनेंट कोकर ने विकसित कराया था। यहां से आसपास की घाटियों और पहाड़ियों का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।
डॉल्फिन्स नोज
चट्टान का एक हिस्सा दूर से डॉल्फिन की नाक जैसा दिखाई देता है, इसलिए इसे डॉल्फिन्स नोज नाम दिया गया। यहां पहुंचने के लिए ट्रेकिंग करनी पड़ती है।
रास्ते में चट्टानी इलाके, पेड़-पौधे और पहाड़ी रास्ते इस सफर को रोमांचक बनाते हैं।
ग्रीन वैली व्यू
ग्रीन वैली व्यू को पहले सुसाइड पॉइंट के नाम से भी जाना जाता था। यहां से नीचे फैली घाटियों और पहाड़ों का विस्तृत नजारा देखा जा सकता है। साफ मौसम में वैगई डैम की दिशा में भी दृश्य दिखाई देते हैं।
बेयर शोला फॉल्स
झरने और हरियाली पसंद करने वाले लोगों के लिए बेयर शोला फॉल्स एक आकर्षण है। यह कोडाई लेक से कुछ दूरी पर स्थित है और बारिश के मौसम में यहां पानी का प्रवाह बढ़ जाता है।
नाम को लेकर स्थानीय मान्यता है कि पहले इस इलाके में भालू पानी पीने के लिए आते थे, इसी वजह से इसे बेयर शोला फॉल्स कहा जाने लगा।
पाइन फॉरेस्ट
लंबे-लंबे पाइन के पेड़ों से घिरा इलाका प्रकृति प्रेमियों के लिए खास है। यहां पेड़ों के बीच पैदल घूमने और तस्वीरें लेने का अनुभव अलग ही होता है।
इस क्षेत्र में कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है।
गूना केव्स
गूना केव्स, जिसे डेविल्स किचन के नाम से भी जाना जाता है, अपनी अनोखी चट्टानी संरचना के लिए प्रसिद्ध है। यहां तीन बड़ी चट्टानों के बीच गहरी गुफाओं और आसपास पेड़ों की जड़ों का अलग तरह का दृश्य देखने को मिलता है।
बेरिजम लेक
अगर आप भीड़ से दूर शांत वातावरण में समय बिताना चाहते हैं तो बेरिजम लेक का रुख कर सकते हैं। यह जंगल वाले इलाके में स्थित है और यहां पहुंचने के लिए वन क्षेत्र से होकर जाना पड़ता है।
यहां जाने के लिए वन विभाग से अनुमति की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए यात्रा से पहले स्थानीय नियमों की जानकारी लेना बेहतर रहता है।
कोडाइकनाल में कौन-कौन सी एक्टिविटी कर सकते हैं?
कोडाइकनाल सिर्फ घूमने और तस्वीरें लेने तक सीमित नहीं है। यहां प्रकृति और एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए भी कई विकल्प हैं।
- डॉल्फिन्स नोज और आसपास के इलाकों में ट्रेकिंग
- पिलर रॉक्स और अन्य प्राकृतिक स्थलों की सैर
- पाइन फॉरेस्ट में वॉक
- झरनों और जंगलों के आसपास प्रकृति का आनंद
- कुछ क्षेत्रों में स्थानीय नियमों के अनुसार जंगल सफारी
- सोलर ऑब्जर्वेटरी में खगोल विज्ञान से जुड़ी जानकारी लेना
सोलर ऑब्जर्वेटरी कोडाई लेक से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और अंतरिक्ष एवं खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह खास जगह हो सकती है।
दिल्ली से कोडाइकनाल कैसे पहुंचें?
फ्लाइट से
कोडाइकनाल का सबसे नजदीकी प्रमुख एयरपोर्ट मदुरै एयरपोर्ट है, जो लगभग 120-135 किलोमीटर दूर है। यहां से टैक्सी या बस के जरिए कोडाइकनाल पहुंचा जा सकता है।
त्रिची एयरपोर्ट भी एक विकल्प है, जो करीब 150 किलोमीटर की दूरी पर है।
ट्रेन से
ट्रेन से जाने वालों के लिए पलानी रेलवे स्टेशन एक उपयोगी विकल्प है। यह कोडाइकनाल से करीब 64 किलोमीटर दूर है। स्टेशन से आगे टैक्सी और बस की सुविधा मिल सकती है।
इसके अलावा डिंडीगुल जैसे बड़े रेलवे कनेक्शन वाले शहरों के जरिए भी कोडाइकनाल पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग से
सड़क से कोडाइकनाल जाने के लिए मदुरै, डिंडीगुल, पलानी और कोयंबटूर जैसे शहरों से बस और टैक्सी के विकल्प मिलते हैं।
अगर आप भीड़भाड़ वाले पारंपरिक हिल स्टेशनों से अलग दक्षिण भारत की प्राकृतिक खूबसूरती देखना चाहते हैं, तो कोडाइकनाल की यात्रा आपके ट्रैवल प्लान में शामिल की जा सकती है।



















