आजकल दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और चिंता की बात यह है कि अब ये समस्या कम उम्र के लोगों, खासकर महिलाओं को भी प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, 30 से 40 साल की उम्र के बीच की महिलाओं में हृदय रोग का खतरा पहले की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है।
अक्सर महिलाएं शुरुआती संकेतों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे समय पर जांच और इलाज नहीं हो पाता। यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर स्थिति, जैसे हार्ट अटैक, का कारण बन सकती है।
एक उदाहरण के तौर पर, दक्षिण मुंबई की 35 वर्षीय कामकाजी महिला ऋचा कुमार, जो खुद को पूरी तरह फिट मानती थीं, लंबे समय तक हल्की थकान और सीने में दर्द को नजरअंदाज करती रहीं। जनवरी 2026 में उन्हें अचानक तेज सीने में दर्द हुआ, जिसके बाद पता चला कि उन्हें हार्ट अटैक आया है। जांच में सामने आया कि यह समस्या उनके पारिवारिक इतिहास से भी जुड़ी थी। समय पर इलाज और एंजियोप्लास्टी के जरिए उनकी स्थिति में सुधार हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में हृदय रोग बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें अनुवांशिकता (जेनेटिक्स) भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई बार ऐसे लोग भी इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं, जिनमें मोटापा या धूम्रपान जैसी आदतें नहीं होतीं।
डॉक्टरों के अनुसार, महिलाओं में हार्ट से जुड़े लक्षण पुरुषों से अलग हो सकते हैं। उनमें सामान्य सीने के दर्द के अलावा अत्यधिक थकान, सांस फूलना, पीठ या जबड़े में दर्द जैसे संकेत भी दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव और गर्भावस्था से जुड़ी स्थितियां भी दिल की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।
इस जोखिम को कम करने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव को नियंत्रित करना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमर:
यह जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी तरह के लक्षण महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर या योग्य चिकित विशेषज्ञ से सलाह लें।



















