देशभर में इन दिनों गणेश उत्सव का माहौल है। घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। गणपति बप्पा को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता के रूप में मानने की परंपरा भारत में सदियों पुरानी है।
हालांकि, भगवान गणेश की आस्था केवल भारत की सीमाओं तक ही सीमित नहीं है। एशिया के कई देशों में गणेश की प्रतिमाएं, मंदिर और धार्मिक स्थल मौजूद हैं। खास बात यह है कि अलग-अलग देशों में गणेश की उपासना वहां की स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ अलग-अलग रूपों में दिखाई देती है।
दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय धर्म, कला और संस्कृति का प्रभाव लंबे समय से रहा है। इसी वजह से नेपाल, थाईलैंड, इंडोनेशिया, जापान और श्रीलंका जैसे देशों में गणेश से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप देखने को मिलते हैं।
नेपाल में गणेश पूजा की पुरानी परंपरा
भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। खासकर काठमांडू घाटी में गणेश को समर्पित कई मंदिर और धार्मिक स्थल मौजूद हैं।
नेपाल की धार्मिक परंपराओं में गणेश को शुभ कार्यों की शुरुआत और बाधाओं को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। काठमांडू जाने वाले पर्यटक पशुपतिनाथ मंदिर और दूसरे प्रमुख धार्मिक स्थलों के साथ स्थानीय गणेश मंदिरों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
थाईलैंड में ‘फ्रा फिकानेत’ के नाम से पूजे जाते हैं गणेश
थाईलैंड में भगवान गणेश को ‘फ्रा फिकानेत’ के नाम से जाना जाता है। बैंकॉक सहित कई स्थानों पर गणेश की प्रतिमाएं और धार्मिक स्थल देखने को मिलते हैं।
थाई संस्कृति में गणेश को कला, रचनात्मकता, सफलता और कार्यों में उन्नति से जोड़कर भी देखा जाता है। बैंकॉक जैसे आधुनिक शहर में गणेश से जुड़े धार्मिक स्थलों पर भारतीय धार्मिक परंपराओं और स्थानीय संस्कृति का मिश्रित प्रभाव दिखाई देता है।
बाली में मंदिरों के साथ दिखाई देती है गणेश की छवि
इंडोनेशिया का बाली द्वीप अपनी हिंदू परंपराओं, मंदिरों और विशिष्ट स्थापत्य शैली के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। यहां कई हिंदू धार्मिक स्थलों पर भगवान गणेश की प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं।
बाली की धार्मिक कला और वास्तुकला में गणेश की छवि का विशेष स्थान है। कई मंदिरों के प्रवेश द्वार या मंदिर परिसर में गणेश की मूर्तियां दिखाई देती हैं। यहां की यात्रा के दौरान पर्यटकों को स्थानीय कला, प्रकृति, मंदिर स्थापत्य और हिंदू धार्मिक परंपराओं का अनोखा मेल देखने को मिलता है।
जापान में ‘कांगितेन’ से जुड़ी है गणेश की परंपरा
जापान में भी गणेश का एक अलग सांस्कृतिक और धार्मिक स्वरूप देखने को मिलता है। यहां गणेश से जुड़े स्वरूप को ‘कांगितेन’ के नाम से जाना जाता है। जापानी बौद्ध परंपराओं में गणेश से संबंधित मान्यताओं और प्रतिमाओं के ऐतिहासिक संदर्भ मिलते हैं।
हालांकि, जापान में गणेश की प्रस्तुति भारत की पारंपरिक छवि से अलग हो सकती है। यही वजह है कि भारतीय धर्म, बौद्ध परंपरा और एशियाई सांस्कृतिक इतिहास को समझने वाले लोगों के लिए यह विषय खास रुचि का हो सकता है।
जापान में गणेश से जुड़े स्थल आम पर्यटक स्थलों की तरह व्यापक रूप से प्रसिद्ध नहीं हैं। ऐसे स्थानों की यात्रा करने से पहले उनके धार्मिक महत्व, स्थान और प्रवेश संबंधी जानकारी जुटाना उपयोगी रहता है।
श्रीलंका में हिंदू मंदिरों में गणेश की पूजा
श्रीलंका में भी हिंदू धार्मिक परंपराओं की मजबूत मौजूदगी देखने को मिलती है। देश के कई हिंदू मंदिरों में भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
विशेष रूप से तमिल हिंदू समुदाय की धार्मिक परंपराओं में गणेश पूजा का महत्वपूर्ण स्थान है। श्रीलंका के विभिन्न धार्मिक स्थलों और मंदिरों में गणेश की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को देखने को मिल सकती हैं।
इस तरह भारत से बाहर भी भगवान गणेश की आस्था अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में दिखाई देती है। कहीं उन्हें शुभ शुरुआत और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है, तो कहीं स्थानीय धार्मिक परंपराओं के साथ उनका स्वरूप विकसित हुआ है। यही विविधता गणेश से जुड़ी भारतीय सांस्कृतिक विरासत को एशिया के अलग-अलग हिस्सों में देखने का अवसर देती है।



















