यमन की राजधानी सना में शनिवार देर रात अचानक तेज धमाकों की आवाज से हड़कंप मच गया। शहर पर नियंत्रण रखने वाले हूती समूह से जुड़े मीडिया संस्थान ने दावा किया कि सऊदी अरब की ओर से सना में कई हवाई हमले किए गए हैं। हमलों के दौरान राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में लड़ाकू विमानों की आवाज और विस्फोट सुनाई देने की बात सामने आई है।
सना में रहने वाले लोगों के मुताबिक, रात के समय लगातार तेज धमाके हुए। विस्फोट इतने शक्तिशाली थे कि कई इलाकों में घरों की खिड़कियां हिलने लगीं और इमारतों में कंपन महसूस किया गया। कुछ लोगों ने बताया कि अचानक हुए धमाकों से बच्चे डरकर उठ गए।
स्थानीय लोगों का अनुमान है कि हवाई हमलों में हूती समूह से जुड़े सैन्य ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया गया। हालांकि, हमलों के बाद तत्काल किसी बड़ी जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सऊदी ठिकाने पर हमले का हूतियों ने किया दावा
सना में कथित एयर स्ट्राइक से पहले हूती समूह ने भी सऊदी अरब पर हमला करने का दावा किया था। हूती पक्ष के मुताबिक, रियाद में सऊदी अरामको से जुड़ी एक सुविधा को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया।
हूतियों ने दावा किया कि यह कार्रवाई यमन में सऊदी अरब की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के जवाब में की गई। हूती सैन्य प्रवक्ता की ओर से यह भी दावा किया गया कि पिछले 24 घंटे के दौरान यमन में करीब 60 हवाई और मिसाइल हमले किए गए हैं।
इन घटनाओं के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है। हाल के दिनों में मिसाइल और ड्रोन हमलों के साथ-साथ हवाई कार्रवाई भी तेज होने की बात सामने आई है।
समुद्री नाकेबंदी के ऐलान के बाद बढ़ा तनाव
सऊदी अरब और हूती समूह के बीच तनाव पहले से ही काफी ज्यादा है। हूतियों की ओर से 20 जुलाई को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा किए जाने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई थी।
इसके बाद दोनों पक्षों की तरफ से सीमा पार हमलों की घटनाएं सामने आती रही हैं। मिसाइल और ड्रोन हमलों के अलावा यमन में हवाई कार्रवाई भी संघर्ष का बड़ा हिस्सा बनी हुई है।
मोचा और मय्यून द्वीप पर भी हूतियों का कब्जा
सितंबर में हूती लड़ाकों और यमन की सरकारी सेना के बीच संघर्ष तेज होने के बाद हालात और बिगड़ गए। यमन की सरकारी सेना को सऊदी अरब का महत्वपूर्ण सैन्य समर्थन प्राप्त है।
हूती समूह ने 10 सितंबर को लाल सागर के तट पर स्थित रणनीतिक बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जे का दावा किया था। इसके अगले दिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मय्यून द्वीप पर भी नियंत्रण हासिल करने की बात कही गई।
इन इलाकों की रणनीतिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम माने जाते हैं।
2014 से जारी है यमन का संघर्ष
यमन में मौजूदा गृहयुद्ध की जड़ें वर्ष 2014 में हुए सत्ता संघर्ष से जुड़ी हैं। उस दौरान हूती समूह ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से में अपना प्रभाव स्थापित कर लिया।
इसके बाद मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सैन्य अभियान शुरू किया। तब से यमन में संघर्ष अलग-अलग चरणों में जारी है।
सना में ताजा हवाई हमलों और सऊदी अरब पर हूतियों के कथित हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है।


















