इजरायल में चुनावी विवाद के बीच राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने फिलिस्तीनी मतदाताओं के समर्थन में बयान देकर राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके सहयोगियों की ओर से अरब राजनीतिक दलों पर मतदान में गड़बड़ी और मतदाताओं को प्रभावित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस बीच राष्ट्रपति हर्जोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी जांच के दौरान पूरे समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है।
राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा कि इजरायल में चुनाव के दौरान विदेशी हस्तक्षेप की आशंकाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले को लेकर केंद्रीय चुनाव समिति और घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के प्रमुख से बातचीत भी की है। उनका कहना है कि सामने आए संदेहों की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी अपील की कि जांच के नाम पर उन सभी फिलिस्तीनी मतदाताओं को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए, जिन्होंने अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए मतदान में हिस्सा लिया है।
फिलिस्तीनी मतदाताओं को लेकर क्या बोले राष्ट्रपति हर्जोग?
इसाक हर्जोग ने कहा कि चुनाव में मतदान करने वाले हर नागरिक के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि किसी तरह की अनियमितता के आरोप सामने आए हैं तो उनकी जांच संबंधित एजेंसियों को करनी चाहिए, लेकिन इसके आधार पर पूरे समुदाय को दोषी ठहराना सही नहीं होगा।
राष्ट्रपति के मुताबिक, लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले लोगों को सामूहिक रूप से संदेह के घेरे में रखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी नजर चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े सभी संदेहों और घटनाक्रम पर बनी हुई है।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री नेतन्याहू चुनाव में कथित गड़बड़ी को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। नेतन्याहू का दावा है कि विदेशी ताकतों ने अरब राजनीतिक दलों के समर्थन में मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की है।
राजनीतिक दलों से हर्जोग की खास अपील
इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। राष्ट्रपति हर्जोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे गठबंधन से जुड़ी बातचीत के दौरान देश के व्यापक हितों को प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि आधिकारिक चुनाव परिणाम सामने आने के बाद वह सरकार गठन की प्रक्रिया के तहत सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में पार्टियों से उनके विचार और सरकार बनाने को लेकर संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी।
हर्जोग ने नेताओं से अपना नजरिया व्यापक रखने और खुले मन से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर यह सोचना चाहिए कि देश के लिए सबसे बेहतर क्या होगा।
राष्ट्रपति के इस संदेश को चुनाव के बाद संभावित गठबंधन और सरकार गठन की प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
कतर ने चुनाव में हस्तक्षेप के आरोपों को बताया बेबुनियाद
इजरायल के चुनावी विवाद में कतर का नाम सामने आने के बाद वहां की सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल अंसारी ने इजरायली चुनाव में हस्तक्षेप करने के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
उन्होंने कहा कि कतर ने न तो इजरायल के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की है और न ही चुनावी नतीजों को बदलने के उद्देश्य से किसी गतिविधि को आर्थिक मदद दी है।
अल अंसारी ने नेतन्याहू और उनके सहयोगियों की ओर से लगाए गए आरोपों को बेतुका और खतरनाक बताया। कतर के इस बयान के बाद चुनावी विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक रूप ले लिया है।
चुनावी आरोपों के बीच बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
इजरायल में एक तरफ नेतन्याहू चुनावी प्रक्रिया में विदेशी हस्तक्षेप और वोट खरीदने के आरोप लगा रहे हैं, वहीं राष्ट्रपति हर्जोग ने पूरे फिलिस्तीनी समुदाय को निशाना बनाने से बचने की अपील की है। दूसरी तरफ कतर ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
ऐसे में अब सबकी नजर चुनावी आरोपों की जांच और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पर टिकी है। आने वाले दिनों में राष्ट्रपति की राजनीतिक दलों के साथ होने वाली बैठकें इजरायल की सत्ता की तस्वीर स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।



















