अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को लेकर लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू के एक बयान ने नई चर्चा छेड़ दी है। परड्यू ने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने कभी यह सवाल रखा था कि क्या चीन अमेरिका से हथियार खरीदना चाहेगा।
परड्यू ने यह बात ट्रंप और जिनपिंग के बीच हालिया मुलाकात के संदर्भ में कही। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह बातचीत कब हुई थी और क्या वास्तव में हथियार बेचने का कोई औपचारिक प्रस्ताव रखा गया था।
ट्रंप ने जिनपिंग से क्या कहा था?
अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, ट्रंप का तर्क यह था कि अमेरिका दुनिया के कई देशों को हथियार बेचता है। इसी संदर्भ में उन्होंने कथित तौर पर शी जिनपिंग से पूछा था कि क्या चीन भी अमेरिकी हथियार खरीदना चाहेगा।
परड्यू ने इसे अमेरिका की मौजूदा नीति के संदर्भ में बताया, जिसके तहत वॉशिंगटन ताइवान को अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए हथियार उपलब्ध कराता है। अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को लेकर यह मुद्दा बेहद संवेदनशील माना जाता है।
ट्रंप ने बाद में दावे से जताई अनभिज्ञता
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह है कि 28 सितंबर को ट्रंप से जब इस कथित प्रस्ताव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसी बात नहीं सुनी है और उन्हें इस बारे में परड्यू से पूछना होगा। यानी फिलहाल राजदूत के बयान के बावजूद चीन को अमेरिकी हथियार बेचने की किसी औपचारिक डील की पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए इस दावे को फिलहाल एक राजनयिक बयान के रूप में देखा जा रहा है, न कि अमेरिका-चीन के बीच हथियारों की बिक्री पर हुए समझौते के तौर पर।
ताइवान को लेकर क्यों अहम है यह मामला?
ताइवान अमेरिका और चीन के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और अमेरिकी हथियारों की बिक्री का लंबे समय से विरोध करता रहा है।
दूसरी ओर, अमेरिका ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध न होने के बावजूद उसकी आत्मरक्षा के लिए सैन्य सहायता और हथियारों की बिक्री करता रहा है। हालिया अमेरिकी-चीनी शिखर वार्ता के बाद भी ताइवान को लेकर अमेरिकी नीति में किसी बदलाव की घोषणा नहीं हुई है।
ताइवान के लिए बड़ा हथियार पैकेज अभी भी चर्चा में
हाल के दिनों में ताइवान को प्रस्तावित करीब 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को लेकर भी चर्चा होती रही है। रिपोर्टों के मुताबिक यह पैकेज अभी मंजूरी का इंतजार कर रहा है। ताइवान के अधिकारियों ने कहा है कि अमेरिका के साथ हथियारों को लेकर बातचीत जारी है और उन्हें अमेरिकी समर्थन की नीति में बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं।
वहीं चीन लगातार अमेरिका से ताइवान को हथियारों की बिक्री रोकने की मांग करता रहा है। आगामी समय में यह मुद्दा वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच संबंधों में अहम बना रह सकता है।
क्या चीन सच में अमेरिकी हथियार खरीदेगा?
फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि चीन ने अमेरिकी हथियार खरीदने पर सहमति जताई है। उपलब्ध जानकारी में केवल परड्यू का यह दावा सामने आया है कि ट्रंप ने कभी शी जिनपिंग के सामने ऐसी संभावना का सवाल रखा था। इसके अलावा ट्रंप ने खुद इस दावे पर अनभिज्ञता जताई है।
इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका और चीन के बीच हथियारों की खरीद-बिक्री को लेकर कोई समझौता हो गया है। दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, ताइवान और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी है, लेकिन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी बनी हुई है।



















