मिडिल ईस्ट: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर स्तर पर पहुंचता नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशों के बीच अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई कार्रवाई की है।
अमेरिकी पक्ष के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के जवाब में की गई। हमलों के बाद ईरान के कई तटीय इलाकों में विस्फोटों की खबर सामने आई है।
चाबहार से बंदर अब्बास तक सुनाई दिए धमाके
ईरान के स्थानीय मीडिया और IRGC से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी कार्रवाई के बाद देश के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में कई स्थानों पर जोरदार धमाकों की आवाज सुनी गई।
चाबहार, बंदर अब्बास, कोणारक, केशम, जास्क, सिरिक और मीनाब जैसे तटीय क्षेत्रों से विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं के कारण इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी सेना ने अपने स्थानीय समय के हिसाब से दोपहर करीब 12 बजे IRGC के ठिकानों के खिलाफ अभियान शुरू किया।
जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के मिसाइल हमले का दावा
अमेरिकी कार्रवाई से पहले ईरान की ओर से जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई थी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने रविवार को अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले क्षेत्र की ओर कम से कम आठ बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं।
यह हमला लारक द्वीप पर IRGC के मिसाइल लॉन्च सिस्टम को निशाना बनाकर की गई अमेरिकी कार्रवाई के बाद हुआ था। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, मिसाइल हमले से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
वहीं ईरानी पक्ष ने अलग दावा किया। ईरान की ओर से कहा गया कि मिसाइलों का निशाना जॉर्डन में स्थित किंग हुसैन और अल-अजराक सैन्य ठिकानों के वे हिस्से थे, जहां तकनीकी एवं रखरखाव से जुड़ी सुविधाएं और लड़ाकू विमानों से संबंधित क्षेत्र मौजूद थे। ईरान ने अपने हमले से भारी नुकसान होने का दावा किया है।
ट्रंप ने पहले ही दी थी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ईरान के हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका ईरान की कार्रवाई को नजरअंदाज नहीं करेगा और इसका जवाब दिया जाएगा।
ट्रंप ने यह भी बताया कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों में से एक को अमेरिकी एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट नहीं किया, क्योंकि आकलन के मुताबिक वह किसी महत्वपूर्ण लक्ष्य तक पहुंचने वाली नहीं थी। दूसरी मिसाइलों को रास्ते में ही रोकने का दावा किया गया।
हालांकि, ट्रंप ने बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत की इच्छा जता रहा है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में किसी संभावित समझौते पर भरोसा करना कितना संभव होगा, यह स्पष्ट नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर अब तेजी से दिखाई देने लगा है।
होर्मुज को लेकर क्यों बढ़ रही है चिंता?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। खासतौर पर खाड़ी क्षेत्र से होने वाले तेल निर्यात के लिए इसकी अहम भूमिका है।
जानकारी के मुताबिक, 14 जुलाई से ईरानी बंदरगाहों से जुड़े समुद्री आवागमन पर नाकाबंदी दोबारा शुरू होने के बाद से होर्मुज क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ा है। इस अवधि में ईरान पर कई वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने के आरोप लगे हैं।
समुद्री सुरक्षा पर नजर रखने वाली संस्था UKMTO के अनुसार, हाल के दिनों में ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ी है और कुछ हमले 24 अगस्त के बाद सामने आए।
ईरान की ओर से पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है कि अगर उसके खिलाफ दबाव और सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो वह खाड़ी देशों से होने वाले तेल निर्यात को रोकने जैसे कदम उठा सकता है।
अमेरिकी हमलों और ईरान की जवाबी धमकियों के बाद अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में दोनों देशों का अगला कदम इस संकट की दिशा तय करने में अहम हो सकता है।



















