बांग्लादेश की ढाका यूनिवर्सिटी में इतिहास और राजनीतिक विरासत से जुड़ा विवाद गहरा गया है। यूनिवर्सिटी के ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन (DUCSU) के ऐतिहासिक संग्रहालय को दोबारा खोले जाने के बाद वहां पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना से जुड़ी तीन तस्वीरें प्रदर्शित की गईं। वहीं, पहले प्रदर्शित शेख मुजीबुर्रहमान की कई प्रमुख तस्वीरें नए संग्रह में दिखाई नहीं दीं। इसके बाद छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया।
संग्रहालय में क्या बदला गया?
रिनोवेशन के बाद दोबारा खोले गए DUCSU संग्रहालय में बांग्लादेश के इतिहास से जुड़े कई पुराने फोटो और दस्तावेजों के साथ बदलाव किए गए। रिपोर्टों के अनुसार, शेख मुजीबुर्रहमान की स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी प्रमुख तस्वीरें अब प्रमुखता से प्रदर्शित नहीं हैं।
इनमें 1952 का भाषा आंदोलन, 1954 का यूनाइटेड फ्रंट चुनाव, 1966 का छह सूत्री आंदोलन, 1968 का अगरतला षड्यंत्र मामला, 1969 का जन आंदोलन और 1970 के आम चुनाव से संबंधित तस्वीरें शामिल थीं। संग्रहालय में 1974 में मुजीब के बेटों की शादी की तस्वीरें और कुछ अखबारी कतरनें मौजूद होने की जानकारी सामने आई है।
इसके साथ ही मोहम्मद अली जिन्ना से जुड़ी तीन तस्वीरें लगाई गईं। इनमें 21 मार्च 1948 को ढाका के तत्कालीन रेसकोर्स मैदान में दिए गए उनके भाषण की तस्वीर, 1940 के लाहौर मुस्लिम लीग सम्मेलन का फोटो और 1970 के चुनाव से संबंधित अखबार की एक कतरन शामिल थी।
जिन्ना की तस्वीरों पर छात्रों का विरोध
तस्वीरें लगाए जाने के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में विरोध शुरू हो गया। 14 सितंबर को एक छात्र ने संग्रहालय में प्रदर्शित जिन्ना की तस्वीरों को फ्रेम से निकालकर फाड़ दिया। इसके बाद छात्र संगठनों ने भी विरोध दर्ज कराया।
बांग्लादेश छात्र फेडरेशन की यूनिवर्सिटी इकाई के कार्यकर्ताओं ने विरोध में जमात-ए-इस्लामी के पूर्व नेता गुलाम आजम की जूते से पिटाई वाली तस्वीर भी संग्रहालय में लगा दी। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि संग्रहालय को किसी एक पक्ष के नजरिए से इतिहास प्रस्तुत करने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
15 सितंबर को विरोध और आगे बढ़ गया। कुछ छात्रों ने DUCSU भवन और संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर जिन्ना और गुलाम आजम की तस्वीरें जमीन पर रखकर उन्हें पैरों से रौंदते हुए प्रदर्शन किया।
DUCSU की ओर से क्या सफाई दी गई?
DUCSU की मुक्ति युद्ध और लोकतांत्रिक आंदोलन मामलों की सचिव फातिमा तस्नीम जुमा ने कहा कि संग्रहालय में किए गए बदलावों का उद्देश्य इतिहास के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखना है। उनके अनुसार, 5 अगस्त 2024 के बाद कुछ ऐसी तस्वीरें हटाई गईं जिन्हें वे राजनीतिक संदर्भ में विवादित मानती हैं।
जिन्ना की तस्वीरों को लेकर उनका कहना था कि इन्हें सम्मान के तौर पर नहीं बल्कि ऐतिहासिक संदर्भ में प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि संग्रहालय में मुजीबुर्रहमान से जुड़े कुछ ऐतिहासिक संदर्भों को दूसरे रूप में शामिल किया गया है। हालांकि, संग्रहालय के निरीक्षण को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में उनकी प्रमुख तस्वीरों की अनुपस्थिति दर्ज की गई है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जांच के आदेश दिए
विवाद बढ़ने के बाद ढाका यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। प्रशासन की ओर से कहा गया कि संग्रहालय में जिन्ना और अब्दुल मलिक से जुड़ी तस्वीरों का प्रदर्शन भाषा आंदोलन और बांग्लादेश के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास के संदर्भ में विवाद पैदा करता है।
प्रशासन ने हाल की घटनाओं की जांच के लिए तीन समितियां गठित की हैं। विश्वविद्यालय परिसर में बिना अनुमति किए गए बदलाव और गतिविधियों को लेकर भी कार्रवाई की बात कही गई है।
इतिहास और राजनीतिक विरासत को लेकर बढ़ी बहस
DUCSU संग्रहालय का विवाद सिर्फ तस्वीरों तक सीमित नहीं रहा है। इसमें बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम, भाषा आंदोलन और 1971 के इतिहास को किस तरह प्रदर्शित किया जाए, इस पर भी बहस तेज हो गई है।
एक तरफ DUCSU से जुड़े लोगों का कहना है कि संग्रहालय में ऐतिहासिक घटनाओं के अलग-अलग पक्षों को शामिल किया जाना चाहिए, वहीं विरोध करने वाले छात्र संगठनों का आरोप है कि प्रमुख ऐतिहासिक हस्तियों और घटनाओं को हटाने से इतिहास की प्रस्तुति प्रभावित हो रही है। ढाका यूनिवर्सिटी के एक शिक्षक नेटवर्क ने भी संग्रहालय में किए गए बदलावों और तस्वीरें हटाए जाने पर आपत्ति जताई है।
फिलहाल विश्वविद्यालय की जांच समितियां मामले से जुड़े घटनाक्रम और संग्रहालय में किए गए बदलावों की समीक्षा कर रही हैं। इस बीच जिन्ना की तस्वीरों को लेकर छात्रों का विरोध भी जारी है।



















