नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोसी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए थे। इसी बीच चीन ने एक नई संभावित बाढ़ को लेकर चेतावनी जारी की थी। चीनी जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में छोछेन खोला और पुरेपू त्सांगपो नदियों के संगम के पास एक बड़ी बैरियर झील बन गई थी।
27 अगस्त की सुबह तक इस झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा होने का अनुमान था और झील से पानी बाहर निकलना शुरू हो गया था। चीनी अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी इसमें पहुंच सकता है, जिससे इसके टूटने का खतरा बढ़ सकता है। बाद में 28 अगस्त को बैरियर झील के टूटने की खबर सामने आई।
जयशंकर ने काठमांडू और बीजिंग के राजदूतों के साथ की समीक्षा
नेपाल में बाढ़ की स्थिति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 अगस्त को समीक्षा बैठक की। इसमें विदेश सचिव, विदेश मंत्रालय के अधिकारी और काठमांडू तथा बीजिंग में भारत के राजदूत शामिल हुए।
जयशंकर ने बताया था कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनकी सुरक्षा का पता लगाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय राज्य सरकारों, विभिन्न मंत्रालयों, टूर ऑपरेटरों और परियोजना अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा था।
भारत ने नेपाल सरकार और स्थानीय अधिकारियों के साथ भी राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर संपर्क बनाए रखा।
कैसे आई थी नेपाल में अचानक बाढ़?
26 अगस्त को भोटेकोसी नदी के आसपास अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। शुरुआती घटनाक्रम में रसुवा जिले के नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र के पास तिमुरे और आसपास के इलाकों पर इसका असर पड़ा।
रिपोर्टों के मुताबिक, भोटेकोसी की एक सहायक नदी का प्रवाह हिमस्खलन और मलबे के कारण प्रभावित हुआ था। इसके बाद अचानक पानी का तेज बहाव नीचे की ओर आया और रास्ते में सड़क, पुल, इमारतों तथा अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।
भारत ने भेजी राहत की दूसरी खेप
नेपाल में तबाही के बाद भारत ने राहत एवं बचाव अभियान के लिए सहायता भेजी। 26 अगस्त को करीब 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां भेजी गई थीं। इसके बाद 27 अगस्त को भारत ने 37.5 टन राहत सामग्री, दवाइयां और खाद्य पैकेट लेकर दूसरी खेप रवाना की।
भारत की ओर से भेजी गई सहायता में आपदा राहत से जुड़ी जरूरी सामग्री शामिल थी। भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल में संबंधित अधिकारियों को राहत सामग्री सौंपने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
मध्य प्रदेश सरकार ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
नेपाल में फंसे या प्रभावित हुए मध्य प्रदेश के नागरिकों और उनके परिजनों की सहायता के लिए राज्य सरकार ने नई दिल्ली में कंट्रोल रूम स्थापित किया था।
जरूरत पड़ने पर इन माध्यमों से संपर्क किया जा सकता है:
- हेल्पलाइन: 011-26772005
- व्हाट्सऐप: 9818963273
- ईमेल: recp1mpbhawan@mp.gov.in
राज्य सरकार के मुताबिक, इन माध्यमों के जरिए नेपाल में मौजूद मध्य प्रदेश के नागरिकों और उनके परिवारों को सहायता एवं जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
नेपाल में तबाही का असर अभी भी जारी
26 अगस्त की बाढ़ के बाद नेपाल में बड़े पैमाने पर खोज और राहत अभियान चलाया गया। बाद के अपडेट में भी बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए और कई शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी रही। 16 सितंबर तक नेपाल की आपदा प्राधिकरण के अनुसार करीब 5,200 लोग अब भी लापता थे, जिनमें 636 विदेशी नागरिक शामिल थे, जबकि कम से कम 1,399 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी।
इस आपदा के बाद नेपाल और आसपास के इलाकों में राहत, खोज और पुनर्वास का काम लंबे समय तक चलने की स्थिति बनी हुई है।



















