अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से जुड़े ऊर्जा संबंधी फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता नजर आ रहा है। रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने रूसी तेल की खरीद पर प्रतिबंधों को कमजोर करने के किसी भी कदम का विरोध करने के लिए द्विदलीय विधेयक लाने की घोषणा की है। इस पहल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों के बीच रूस के प्रति अमेरिकी नीति को लेकर बढ़ती असहमति के रूप में देखा जा रहा है।
फिट्जपैट्रिक के प्रस्ताव को रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन का भी समर्थन मिला है। उन्होंने इस विधेयक का सह-प्रायोजक बनने की इच्छा जताई है। हालांकि, विधेयक को कानून का रूप देने की राह आसान नहीं मानी जा रही है। प्रतिनिधि सभा के मौजूदा कार्यकाल की समय-सीमा नजदीक होने के कारण इसे पारित कराने के लिए सांसदों के पास सीमित समय बचा है।
रूसी तेल की खरीद रोकने के लिए लाया जाएगा विधेयक
कांग्रेस के यूक्रेन कॉकस के सह-अध्यक्ष ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रूस से तेल की खरीद रोकने के उद्देश्य से एक द्विदलीय विधेयक पेश किया जाएगा। प्रस्तावित कानून का नाम ‘रोनाल्ड रीगन पीस थ्रू स्ट्रेंथ एक्ट’ रखा गया है।
फिट्जपैट्रिक का मानना है कि रूस से होने वाले ऊर्जा कारोबार पर सख्ती बरतना जरूरी है। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों को एक साथ आना चाहिए। डॉन बेकन ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिकी संसद को रूस के मामले में सख्त रुख अपनाना चाहिए।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य रूस के ऊर्जा कारोबार पर दबाव बनाए रखना और ऐसे फैसलों का विरोध करना है, जिनसे रूसी तेल की खरीद दोबारा बढ़ सकती है।
ट्रंप के फैसले से क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस से जुड़े ऊर्जा प्रतिबंधों में राहत देने के संकेत के बाद अमेरिकी राजनीति में बहस तेज हो गई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद ट्रंप ने रूसी डीजल की आपूर्ति से संबंधित एक समझौते की घोषणा की थी। इस घटनाक्रम को लेकर सांसदों ने सवाल उठाए हैं।
आलोचकों का तर्क है कि रूस के ऊर्जा कारोबार को राहत देने से उसकी अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंच सकता है। उनका मानना है कि ऊर्जा से होने वाली कमाई रूस की युद्ध संबंधी गतिविधियों को जारी रखने में मददगार साबित हो सकती है।
वहीं, ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित रखने और बाजार में आपूर्ति बनाए रखने की जरूरत को भी इस बहस का एक अहम पहलू माना जा रहा है। इसी कारण रूस से ऊर्जा आयात को लेकर अमेरिकी प्रशासन और संसद के कुछ सदस्यों के बीच मतभेद सामने आए हैं।
अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप की नीति पर उठाए सवाल
ट्रंप के फैसले की आलोचना करने वाले सांसदों का कहना है कि रूस पर दबाव बनाए रखने के लिए पहले लागू किए गए प्रतिबंधों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
सीनेटर जीन शाहीन ने रूसी ऊर्जा आयात पर वर्ष 2022 में लागू किए गए प्रतिबंधों का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रपति को इन प्रतिबंधों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने ट्रंप और पुतिन के बीच हुए समझौते की आलोचना की। उनके मुताबिक, रूस के साथ इस तरह का ऊर्जा समझौता अमेरिकी नीति और रूस पर दबाव बनाने के प्रयासों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
डेमोक्रेटिक सांसद डेव मिन ने भी इस मुद्दे पर तंज कसते हुए कहा कि यदि रूस के साथ इसी तरह के समझौते जारी रहते हैं, तो अमेरिका को अपनी ही नीतियों के विरोधाभासों का सामना करना पड़ सकता है।
इन बयानों से स्पष्ट है कि रूस के साथ ऊर्जा कारोबार का मुद्दा अमेरिकी संसद में राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।
रिपब्लिकन सांसद ने भी जताई चिंता
रूस से तेल की आपूर्ति पर प्रतिबंधों में ढील देने के संभावित प्रभावों को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी चिंता दिखाई दे रही है। सांसद माइकल मैक्कॉल ने कहा कि डीजल की कीमतें कम करने के उद्देश्य से रूसी तेल पर प्रतिबंधों में राहत देना रूस की सरकार को आर्थिक मदद पहुंचाने जैसा हो सकता है।
उनका तर्क है कि ऊर्जा की कीमतों को कम करने के प्रयास में रूस की आय बढ़ने से उसकी सैन्य गतिविधियों को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन मिल सकता है। इससे यूक्रेन में जारी संघर्ष और उससे जुड़ी मानवीय समस्याओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
विधेयक के सामने क्या हैं चुनौतियां?
ब्रायन फिट्जपैट्रिक की पहल को रूस के प्रति सख्त नीति बनाए रखने के समर्थकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, केवल विधेयक पेश कर देना पर्याप्त नहीं होगा। इसे संसद में आवश्यक समर्थन हासिल करना और कानून बनने की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
प्रतिनिधि सभा के मौजूदा कार्यकाल की समय-सीमा नजदीक होने से इस प्रस्ताव पर तेजी से काम करने की जरूरत पड़ सकती है। यदि निर्धारित समय में विधेयक आगे नहीं बढ़ता है, तो उसे पारित कराने की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
फिलहाल, इस मुद्दे पर अमेरिकी संसद में मतभेद बने हुए हैं। एक ओर ऊर्जा की कीमतों और आपूर्ति को लेकर चिंताएं हैं, तो दूसरी ओर रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की मांग की जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित विधेयक को कितना समर्थन मिलता है और ट्रंप प्रशासन रूस से जुड़े ऊर्जा संबंधी फैसलों पर क्या रुख अपनाता है।



















