पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब पर हूती हमलों को लेकर भारत ने गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सऊदी अरब के नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमले क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। भारत ने खास तौर पर बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही को लेकर चिंता जाहिर की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात पर नजर रख रहा है। उन्होंने सऊदी अरब की संप्रभु सीमा के भीतर नागरिक बुनियादी ढांचे और आर्थिक प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों को अस्वीकार्य बताया।
जयशंकर ने सऊदी विदेश मंत्री से की बातचीत
रणधीर जायसवाल के मुताबिक, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद से मुलाकात की थी। इस बैठक में हूती गतिविधियों और क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम पर भी चर्चा हुई।
भारत ने इससे पहले 9 सितंबर को भी सऊदी अरब पर हुए हूती हमलों की निंदा की थी। उस समय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नागरिक और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले ऐसे हमले क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता को नुकसान पहुंचाते हैं और बाब-अल-मंदेब में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करते हैं।
बाब-अल-मंदेब को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
बाब-अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके जरिए जहाज लाल सागर और आगे स्वेज नहर की दिशा में आवाजाही करते हैं। ऐसे में इस इलाके में सैन्य तनाव बढ़ने का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
भारत के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आने वाली आपूर्ति पर निर्भर है। विदेश मंत्रालय ने भी क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होने की उम्मीद जताई है।
सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर भी हुए हमले
हाल के दिनों में हूतियों की ओर से सऊदी अरब में तेल और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। 9 सितंबर को भारत ने सऊदी क्षेत्र में तेल और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, इन हमलों में सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा और कई लोग घायल हुए थे।
ताजा घटनाक्रम के बीच लाल सागर क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। बाब-अल-मंदेब के आसपास सुरक्षा स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बनी हुई है।
भारत ने शांति बहाली पर दिया जोर
भारत ने कहा है कि क्षेत्र में इस तरह की सैन्य गतिविधियां स्वीकार्य नहीं हैं और जल्द से जल्द शांति एवं स्थिरता बहाल होनी चाहिए। नई दिल्ली की चिंता सिर्फ सऊदी अरब की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा से भी जुड़ी है।
यमन में सक्रिय हूती समूह और क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के कारण लाल सागर तथा बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले समुद्री मार्गों की सुरक्षा आने वाले दिनों में भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रह सकती है।



















