क्रिकेट के पारंपरिक प्रारूप टेस्ट क्रिकेट में जल्द ही कुछ नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने हाल ही में खेल को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इनमें सबसे चर्चित फैसला खराब रोशनी के दौरान पिंक बॉल के इस्तेमाल से जुड़ा है।
खराब रोशनी में खेल जारी रखने की कोशिश
टेस्ट मैचों में अक्सर खराब रोशनी के कारण खेल समय से पहले रोकना पड़ता है, जिससे कई ओवरों का नुकसान होता है। इसी समस्या के समाधान के लिए ICC ने ट्रायल आधार पर पिंक बॉल के उपयोग की अनुमति दी है।
नई व्यवस्था के तहत यदि मैच के दौरान रोशनी की स्थिति सामान्य लाल गेंद से खेलने के लिए उपयुक्त नहीं रहती, तो दोनों टीमों की सहमति से पिंक बॉल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे खेल को लंबे समय तक जारी रखने और निर्धारित ओवरों की संख्या पूरी करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पिंक बॉल का पहले भी हो चुका है इस्तेमाल
पिंक बॉल क्रिकेट में कोई नई चीज नहीं है। डे-नाइट टेस्ट मैचों में इसका उपयोग पहले से किया जाता रहा है। इसे फ्लडलाइट्स के नीचे आसानी से देखा जा सकता है, इसलिए इसे कम रोशनी की परिस्थितियों में उपयोगी माना जाता है।
क्रिकेट जगत का पहला डे-नाइट टेस्ट मैच वर्ष 2015 में खेला गया था। इसके बाद कई देशों ने गुलाबी गेंद के साथ टेस्ट मुकाबलों की मेजबानी की है।
कोच को मैदान पर मिलने की अनुमति
ICC ने खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान कोच खिलाड़ियों से सीधे बातचीत करने के लिए मैदान पर आ सकेंगे।
इस फैसले का उद्देश्य मैच के दौरान रणनीतिक संवाद को आसान बनाना और खिलाड़ियों तक आवश्यक निर्देश अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।
संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन पर तकनीक की मदद
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत मैच अधिकारियों को संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन की जांच में उन्नत तकनीक का उपयोग करने की अनुमति दी गई है।
अब अधिकारियों को हॉक-आई डेटा देखने की सुविधा मिलेगी, जिससे गेंदबाजों की बांह की गति और गेंद छोड़ने की प्रक्रिया का अधिक सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे विवादित गेंदबाजी एक्शन की पहचान और समीक्षा पहले की तुलना में अधिक वैज्ञानिक तरीके से हो सकेगी।
कब से लागू होंगे नए नियम?
पिंक बॉल से जुड़ा प्रयोगात्मक नियम सीमित आधार पर लागू किया जाएगा और इसके परिणामों की समीक्षा की जाएगी। वहीं हॉक-आई डेटा से संबंधित नया प्रावधान अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने की संभावना है।
खेल को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव टेस्ट क्रिकेट को अधिक प्रतिस्पर्धी, दर्शक-अनुकूल और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। यदि पिंक बॉल प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में इसे व्यापक स्तर पर लागू किए जाने पर भी विचार किया जा सकता है।
इन फैसलों से यह स्पष्ट है कि क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था खेल की पारंपरिक पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिक जरूरतों के अनुरूप नियमों में बदलाव करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।



















