भारत में सालभर धूप निकलती है, फिर भी बड़ी संख्या में लोग विटामिन D की कमी का सामना कर रहे हैं। यह समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे और किशोर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण, हड्डियों को मजबूत बनाने और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर धूप वाले देश में रहने के बावजूद लोगों के शरीर में इस पोषक तत्व का स्तर कम क्यों हो रहा है?
जनवरी 2025 से मई 2026 के बीच किए गए 11.6 लाख से अधिक विटामिन D टेस्ट के आंकड़ों के विश्लेषण में करीब 10 में से 7 लोगों का स्तर कम पाया गया। यह आंकड़ा जांच कराने वाले लोगों से संबंधित है, इसलिए इसे भारत की पूरी आबादी का प्रतिनिधि आंकड़ा नहीं माना जा सकता। फिर भी यह विटामिन D की कमी और उससे जुड़े जोखिमों पर ध्यान देने की जरूरत बताता है।
11.6 लाख से ज्यादा टेस्ट में सामने आई विटामिन D की कमी
विटामिन D के स्तर की जांच से जुड़े आंकड़ों में बड़ी संख्या में लोगों में इसकी कमी या अपर्याप्त स्तर सामने आया। चिंता की बात यह है कि यह समस्या केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं है। बच्चों और किशोरों में भी विटामिन D का स्तर कम पाया जा रहा है।
किशोरावस्था में शरीर और हड्डियों का तेजी से विकास होता है। इस दौरान पर्याप्त पोषण मिलना जरूरी है। लेकिन घर के अंदर अधिक समय बिताना, आउटडोर गतिविधियों में कमी और भोजन से पर्याप्त विटामिन D नहीं मिलना इस समस्या के संभावित कारण हो सकते हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि टेस्ट कराने वाले लोगों के आंकड़े अपने आप में पूरे देश में कमी की वास्तविक दर साबित नहीं करते। इसके बावजूद ये आंकड़े बताते हैं कि विटामिन D की स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
भरपूर धूप के बावजूद शरीर में विटामिन D क्यों कम है?
शरीर की त्वचा सूर्य की पराबैंगनी बी यानी UVB किरणों के संपर्क में आने पर विटामिन D बनाती है। लेकिन केवल धूप वाले देश में रहना पर्याप्त विटामिन D मिलने की गारंटी नहीं है। इसके लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं।
घर और ऑफिस में ज्यादा समय बिताना: आज बहुत से लोग सुबह घर से निकलकर ऑफिस या दूसरी इनडोर जगहों पर पूरा दिन बिताते हैं। बच्चों का भी काफी समय मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर के सामने गुजरता है। इससे बाहर रहने का समय कम हो सकता है।
त्वचा का रंग: त्वचा में मौजूद मेलेनिन UVB किरणों के प्रभाव को कम करता है। इसलिए गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों को समान परिस्थितियों में विटामिन D बनाने के लिए अपेक्षाकृत अधिक UVB एक्सपोजर की जरूरत हो सकती है।
कपड़े और मौसम: शरीर का कितना हिस्सा कपड़ों से ढका है, मौसम कैसा है और धूप कितनी तेज है, ये सभी कारक विटामिन D बनने की मात्रा को प्रभावित कर सकते हैं। वायु प्रदूषण भी जमीन तक पहुंचने वाली UVB किरणों को प्रभावित कर सकता है।
खानपान में कमी: अगर भोजन में विटामिन D के स्रोत कम हैं और शरीर को पर्याप्त धूप भी नहीं मिलती, तो इसकी कमी का जोखिम बढ़ सकता है।
विटामिन D की कमी से हड्डियों को क्या नुकसान होता है?
विटामिन D का प्रमुख काम शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करना है। कैल्शियम हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए जरूरी होता है। लंबे समय तक विटामिन D की गंभीर कमी रहने पर हड्डियों का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
बच्चों में इसकी गंभीर कमी से रिकेट्स हो सकता है। इस स्थिति में हड्डियों का सामान्य विकास प्रभावित होता है। वयस्कों में विटामिन D की गंभीर कमी ऑस्टियोमलेशिया का कारण बन सकती है, जिसमें हड्डियां कमजोर और नरम हो सकती हैं।
इसके अलावा कुछ लोगों को मांसपेशियों में कमजोरी और हड्डियों में दर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। उम्रदराज लोगों में मांसपेशियों की कमजोरी और संतुलन से जुड़ी समस्याएं गिरने का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
हालांकि, केवल थकान या शरीर में दर्द होने से विटामिन D की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती। ऐसे लक्षण कई दूसरी वजहों से भी हो सकते हैं।
क्या सुबह की धूप लेने से विटामिन D की जरूरत पूरी हो जाती है?
सुबह की धूप में बाहर टहलना अच्छी आदत है। इससे शारीरिक गतिविधि बढ़ाने और शरीर की प्राकृतिक दिनचर्या को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन विटामिन D बनाने के लिए पर्याप्त UVB किरणों का त्वचा तक पहुंचना जरूरी है।
सुबह बहुत जल्दी UVB किरणें अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती हैं। दिन का समय, मौसम, भौगोलिक स्थिति और त्वचा का रंग विटामिन D बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। इसलिए हर व्यक्ति के लिए धूप में रहने का एक ही समय तय करना सही नहीं है।
धूप लेते समय त्वचा को जलने से बचाना भी जरूरी है। लंबे समय तक बिना सुरक्षा के तेज धूप में रहना त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। विटामिन D की कमी दूर करने के लिए जरूरत से ज्यादा धूप लेना उचित उपाय नहीं है।
अगर आपको इसकी कमी का जोखिम है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर उचित जांच और जरूरत के अनुसार उपचार कराना बेहतर है।
डाइट में शामिल करें विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थ
धूप के अलावा भोजन भी विटामिन D प्राप्त करने का एक माध्यम है। हालांकि, सामान्य खाद्य पदार्थों से पर्याप्त मात्रा प्राप्त करना कई लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है।
विटामिन D के कुछ प्रमुख स्रोत हैं:
- फोर्टिफाइड दूध और डेयरी उत्पाद: जिन उत्पादों में विटामिन D मिलाया गया हो, वे उपयोगी विकल्प हो सकते हैं।
- तैलीय मछली: सैल्मन और सार्डिन जैसी मछलियों में विटामिन D पाया जाता है।
- अंडे की जर्दी: इसमें सीमित मात्रा में विटामिन D मौजूद होता है।
- फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ: कुछ अनाज और दूसरे खाद्य उत्पादों में भी विटामिन D मिलाया जाता है।
शाकाहारी लोग फोर्टिफाइड दूध, उपलब्ध फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों और डॉक्टर की सलाह के अनुसार अन्य विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। मशरूम में भी विटामिन D की मात्रा हो सकती है, खासकर जब उन्हें UV प्रकाश के संपर्क में उगाया गया हो।
क्या विटामिन D की गोलियां लेना जरूरी है?
हर व्यक्ति को विटामिन D सप्लीमेंट लेने की जरूरत नहीं होती। इसकी आवश्यकता व्यक्ति के खानपान, स्वास्थ्य, कमी के जोखिम और जांच के नतीजों पर निर्भर करती है।
यदि जांच में कमी की पुष्टि होती है, तो डॉक्टर उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार सप्लीमेंट की सही मात्रा और अवधि बता सकते हैं। बिना सलाह के अधिक मात्रा में विटामिन D लेना नुकसानदायक हो सकता है। इसकी अत्यधिक मात्रा शरीर में कैल्शियम बढ़ा सकती है, जिससे मतली, उल्टी, कमजोरी और किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
यदि आपको लंबे समय से हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी या विटामिन D की कमी का संदेह है, तो डॉक्टर से संपर्क करें। जरूरत पड़ने पर वे 25-hydroxyvitamin D ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। यह जांच शरीर में विटामिन D के स्तर का आकलन करने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाती है।
विटामिन D की कमी से बचने के लिए क्या करें?
विटामिन D का स्तर बनाए रखने के लिए संतुलित दिनचर्या अपनाना जरूरी है। नियमित रूप से बाहर की गतिविधियों के लिए समय निकालें, पौष्टिक भोजन करें और अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को समझें।
बच्चों को आउटडोर खेलों के लिए प्रोत्साहित करना, किशोरों के खानपान पर ध्यान देना और बुजुर्गों में हड्डियों की सेहत का ख्याल रखना महत्वपूर्ण है। जिन लोगों को पहले से विटामिन D की कमी, हड्डियों की बीमारी या इससे जुड़े अन्य जोखिम हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार कदम उठाने चाहिए।
निष्कर्ष: भारत में पर्याप्त धूप उपलब्ध होने के बावजूद विटामिन D की कमी के पीछे जीवनशैली, खानपान, त्वचा का रंग और धूप के वास्तविक संपर्क जैसे कई कारण हो सकते हैं। केवल धूप में रहने या अपने आप सप्लीमेंट लेने के बजाय संतुलित आहार, नियमित गतिविधि और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। विटामिन D की कमी का निदान केवल लक्षणों के आधार पर नहीं किया जा सकता। जांच, सप्लीमेंट की मात्रा और उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से सलाह लें।



















