इस्लामाबाद: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले सभी सीटों पर 27 जुलाई को एक साथ मतदान होना था, लेकिन अब चुनाव तीन चरणों में कराए जाएंगे। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
पाकिस्तान चुनाव आयोग का कहना है कि मतदान की तारीखों में बदलाव सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और विभिन्न राजनीतिक दलों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। आयोग के अनुसार, चरणबद्ध मतदान से सुरक्षा बलों की प्रभावी तैनाती संभव होगी और चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए जा सकेंगे।
हालांकि, कुछ विपक्षी दलों, जिनमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) भी शामिल है, ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि पहले घोषित कार्यक्रम के अनुसार सभी सीटों पर एक ही दिन मतदान कराया जाना चाहिए था और अंतिम समय में बदलाव से चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
चुनाव से पहले क्षेत्र की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता व्यक्त की गई है। संयुक्त राष्ट्र ने हाल के घटनाक्रमों के संदर्भ में मानवाधिकारों, हिरासत, इंटरनेट सेवाओं में व्यवधान और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई है। साथ ही चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक अधिकारों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
वहीं, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और अन्य संगठनों ने चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पाकिस्तान में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटें क्षेत्र की राजनीति में इस्लामाबाद के प्रभाव को बढ़ाती हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार और वहां की न्यायपालिका इस व्यवस्था को संवैधानिक बताते हुए इसमें बदलाव की मांग को पहले ही खारिज कर चुकी हैं।
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। भारत पहले भी PoJK में कराए जाने वाले चुनावों और प्रशासनिक कदमों को स्वीकार नहीं करता और उन्हें किसी भी प्रकार की कानूनी वैधता नहीं देता है।



















