भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि हाल के दिनों में पाकिस्तान को कोई बाढ़ संबंधी चेतावनी इसलिए नहीं भेजी गई, क्योंकि ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं हुई थी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, चिनाब, तवी, सतलुज और रावी नदियों में जलस्तर फिलहाल सामान्य सीमा के भीतर है और कहीं भी ऐसा असाधारण जलप्रवाह नहीं है, जिससे सीमा पार बाढ़ का खतरा पैदा हो। इसी कारण पाकिस्तान को किसी प्रकार का अलर्ट जारी करने की आवश्यकता नहीं समझी गई।
कब भेजी जाती है बाढ़ संबंधी सूचना?
सरकार ने बताया कि सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुसार बाढ़ संबंधी जानकारी तभी साझा की जाती है, जब असाधारण जलप्रवाह या बाढ़ की स्थिति दूसरे देश को प्रभावित करने की संभावना हो। चूंकि वर्तमान में ऐसी कोई परिस्थिति नहीं है, इसलिए कोई सूचना साझा नहीं की गई।
संधि पर भारत का रुख
सरकार ने यह भी दोहराया कि अप्रैल 2025 में भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का निर्णय लिया था। इसके बाद नियमित रूप से सूचनाएं साझा करने का दायित्व पहले जैसा नहीं रहा। हालांकि, भारत ने मानवीय आधार पर उन परिस्थितियों में आवश्यक जानकारी साझा करना जारी रखा है, जब वास्तविक रूप से गंभीर बाढ़ का खतरा पैदा होने की आशंका होती है।
बाढ़ चेतावनी का आधार क्या है?
अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान चिनाब, तवी, रावी और सतलुज नदियों के अंतिम निगरानी केंद्रों पर दर्ज जलप्रवाह के आधार पर किया जाता है। यदि जलस्तर सामान्य सीमा से काफी ऊपर पहुंचता है और दूसरे देश पर प्रभाव पड़ने की संभावना होती है, तभी चेतावनी जारी की जाती है।
पहले भी भेजी गई थीं कई चेतावनियां
सरकार ने जानकारी दी कि पिछले बाढ़ सीजन के दौरान भारत ने राजनयिक माध्यमों से पाकिस्तान को कई बार बाढ़ संबंधी चेतावनियां भेजी थीं। इस वर्ष भी आवश्यकता पड़ने पर ऐसी जानकारी साझा करने की व्यवस्था बनी हुई है, लेकिन फिलहाल जलस्तर सामान्य होने के कारण कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया।
संयुक्त राष्ट्र में भी दोहराया भारत का पक्ष
इस बीच अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपना रुख दोहराया है। भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग के मुद्दे अलग नहीं हैं तथा आतंकवाद समाप्त हुए बिना सामान्य संबंधों की अपेक्षा करना कठिन है। भारत का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आगे की नीति तय करता रहेगा।
सरकार का कहना है कि बाढ़ संबंधी सभी फैसले तकनीकी आंकड़ों, वास्तविक जलस्तर और स्थापित प्रोटोकॉल के आधार पर लिए जाते हैं तथा वर्तमान परिस्थितियों में पाकिस्तान को चेतावनी भेजने की कोई आवश्यकता नहीं थी।



















