रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने संबंधी विधेयक को लेकर भारत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रस्तावित कानून से जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन कर रही है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत दुनिया के कई देशों से अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुसार तेल खरीदता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेल आयात से जुड़े फैसले देश के राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।
अमेरिका में प्रस्तावित इस विधेयक का उद्देश्य रूस से तेल खरीद जारी रखने वाले देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बनाना बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रस्ताव को कई अमेरिकी सीनेटरों का समर्थन प्राप्त है। यदि यह कानून लागू होता है, तो रूस से तेल आयात करने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का प्रावधान हो सकता है।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित कानून के दायरे में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों का उल्लेख किया गया है। इसका मकसद रूस के ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली आय को सीमित करना और उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।
इस दौरान विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की वीजा नीतियों पर भी प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता ने कहा कि वीजा और आव्रजन संबंधी नियम किसी भी देश का संप्रभु अधिकार हैं। हालांकि, यदि भारतीय छात्रों, यात्रियों या अन्य नागरिकों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना करना पड़ता है, तो भारत सरकार अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष ऐसे मामलों को उठाती है और समाधान के लिए लगातार संपर्क बनाए रखती है।
भारत ने दोहराया कि वह अपने नागरिकों के हितों की रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय हितों के अनुरूप निर्णय लेना जारी रखेगा।



















