संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान न्यूयॉर्क में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। बैठक में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रीय परिस्थितियों और आगामी बहुपक्षीय कार्यक्रमों में दोनों देशों के बीच समन्वय पर चर्चा हुई।
मुलाकात के बाद मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रीय प्राथमिकताओं तथा आने वाले बहुपक्षीय प्रयासों को लेकर तालमेल बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।
SRIA को लेकर भारत की चिंताएं सामने रखीं
बैठक के बाद एस. जयशंकर ने बताया कि उन्होंने अमेरिका के नए Sanctioning Russia and Iran Act (SRIA) को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को मार्को रुबियो के सामने दोहराया। उन्होंने इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की।
अमेरिकी कानून में रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालने के प्रावधान हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, यह टैरिफ भारत पर अपने आप लागू नहीं होता; इसके लिए अमेरिकी प्रशासन की ओर से संबंधित प्रावधान का इस्तेमाल किया जाना जरूरी होगा।
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। भारत पहले भी कह चुका है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बदलती वैश्विक बाजार परिस्थितियों के आधार पर तय होती है तथा ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर भी चर्चा
जयशंकर और रुबियो की बातचीत में केवल टैरिफ और रूस से जुड़े मुद्दे ही नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों की व्यापक दिशा पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों के बीच क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने को लेकर विचार-विमर्श हुआ।
दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी बातचीत जारी है। जयशंकर और रुबियो इससे पहले भी इन मुद्दों पर चर्चा कर चुके हैं।
UN महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे जयशंकर
एस. जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। इस दौरान वह कई देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कर रहे हैं।
इन मुलाकातों में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा, आर्थिक सहयोग तथा बहुपक्षीय संस्थाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा हो रही है। जयशंकर 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की सामान्य बहस को संबोधित करने वाले हैं।
कई देशों के विदेश मंत्रियों से बैठक
न्यूयॉर्क में जयशंकर ने अमेरिका के अलावा कई अन्य देशों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की है। विभिन्न बैठकों में यूक्रेन, खाड़ी क्षेत्र, आर्थिक सहयोग और संयुक्त राष्ट्र में सुधार जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे हैं।
इटली के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी के साथ बातचीत में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC), खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और यूक्रेन से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। भारत और इटली के बीच रक्षा, सुरक्षा, AI, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
ग्लोबल साउथ के मुद्दे भी उठाए
जयशंकर ने न्यूयॉर्क में ग्लोबल साउथ से जुड़े कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया। इन बैठकों में विकासशील देशों के सामने मौजूद आर्थिक दबाव, व्यापारिक चुनौतियों, सप्लाई चेन और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत लगातार बहुपक्षीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका मजबूत करने की बात करता रहा है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत की कूटनीतिक गतिविधियों में ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग और साझा प्राथमिकताओं को भी प्रमुखता दी जा रही है।



















