ये तस्वीर संजय प्लेस में सड़क टूटने से बिखरे हुए पत्थरों के टुकड़ों की है।
आगरा में मानसून ने इस साल में बरसात ने शहर को बेहाल कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गड्ढा मुक्त सड़कों का अभियान इस बारिश के पानी में बह गया। शहर की अधिकांश सड़कों पर गड्ढे हैं। कई जगहों पर गिट्टी उखड़ गई।
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अब इन गड्ढों की चपेट में आने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। नगर निगम हर साल मानसून के बाद 100 से 150 करोड़ रुपए सड़कों की मरम्मत में खर्च कर देता है। इसके बावजूद एक साल में ही सड़कें जस की तस हो जाती हैं। शहर की सड़कों पर पूरी रिपोर्ट-
ये तस्वीर सेंट पीटर्स की तरफ जाने वाली सड़क की है।
2200 किलोमीटर की है सड़कें नगर निगम सीमा में नगर निगम का रोड नेटवर्क करीब 1700 किलोमीटर है। सीमा विस्तार की वजह से रोड नेटवर्क लंबाई बढ़कर करीब 2200 किलोमीटर हो गई है। हर साल मानसून के बाद नगर निगम सड़कों की मरम्मत में 100 से 150 करोड़ रुपये खर्च करता है।
लेकिन, इस मानसून के बाद शहर की अधिकतर सड़कों का बुरा हाल है। सड़कों पर इतने ज्यादा गड्ढे हैं कि लोग बिना गिरे निकल ही नहीं पाते हैं। जल निगम ने भी सीवर और पानी की लाइन के लिए सड़कों की खुदाई की थी। हर जगह सड़कें धंस रही हैं।
दयालबाग में 100 फुटा रोड पर करीब 20 बार गहरे गड्ढे हो चुके हैं। कमलानगर, जगदीशपुरा, आवास विकास कॉलोनी सहित कई क्षेत्र हैं, जहां सीवन लाइन डालने के बाद सड़कें बनी ही नहीं हैं।
ये तस्वीर आगरा के सेंट जोंस चौराहे पर बीच में बने गढ्ढें की है ।
जनकपुरी के लिए हुए थे विकास कार्य पिछले साल संजय प्लेस में जनकपुरी का आयोजन किया गया था। संजय प्लेस की हर सड़क को बनाया गया था। लेकिन एक साल में ही सड़कें बदहाल हो गई हैं। जिस जगह जनकमहल सजा था, उस के सामने सड़क पर गिट्टी निकल आई है। सेंट पीटर्स कॉलेज रोड पर इतने गड्ढे हैं कि हर रोज लोग गिर रहे हैं।
इसी सड़क पर चार-पांच स्कूल हैं। हजारों बच्चे इस सड़क से निकलते हैं। स्थानीय निवासी अमित ने बताया कि हर रोज दो से तीन बच्चे यहां गिरते हैं। कभी ई-रिक्शा गिर जाता है तो कई महिलाएं गिर जाती हैं। लोगों को चोटें भी लगती हैं। इन सड़कों का निर्माण 3-4 करोड़ रुपये में किया गया था।
मॉडल रोड हुई खस्ता हाल नगर निगम ने कमला नगर और कामायनी के सामने भावना रोड को मॉडल रोड बनाया था। कमला नगर मॉडल रोड पर करीब नौ करोड़ रुपये की लागत आई थी। इसी तरह भावन रोड पर करीब 1.65 करोड़ रुपये खर्च किए थे। लेकिन इस साल मानसून की बरसात में सड़कों की हालत खराब कर दी है। सड़कों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं। कमलानगर में रहने वाले सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सड़कों की हालत बहुत ज्यादा खराब है। कई बार मैं गिर चुका हूं। घर तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
इन सड़कों की स्थिति ज्यादा खराब संजय प्लेस, आवास विकास कॉलोनी, कमलानगर, विजय नगर, एमजी रोड, जगदीशपुरा, खंदारी, ट्रांस यमुना, सदर, नौलक्खा, सोहल्ला, राजपुर चुंगी, शाहदरा, यूपीएसआईडीसी, शमसाबाद रोड, सेवला रोड, ग्वालियर रोड, मारूति एस्टेट, बिचपुरी रोड, वायु विहार रोड, शास्त्रीपुरम।
318 करोड़ रुपये से हुए थे काम वेस्टर्न जोन में जलनिगम ने 252 किमी लंबी सीवर लाइन बिछाई है। 118 किमी लंबी पानी की लाइनें भी बिछाई गई हैं। दोनों प्रोजेक्ट के कारण करीब 250 किमी लंबी सड़कें खोखली होने के साथ गड्ढों में समा गई हैं। इन पर 318 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। नीतेश नगर, चाणक्यपुरी, लोहामंडी, भीमनगर, किशोरपुरा, गढ़ी भदौरिया, जगदीशपुरा, बौद्ध नगर, नगला अजीता, पुष्पांजलि नगर, सुलहकुल नगर, शांतिपुरम, बीधा नगर, गोकुल नगर, पुनीत विहार, बंशी विहार, देहतोरा, प्रकाश नगर, सुभाष नगर, रामस्वरूप कॉलोनी, यूपीएसआईडीसी, लखनपुर, मनहर गार्डन, मोहम्मदपुर, शांति रेजीडेंसी, नारायण विहार, शैलेंद्र पुरम, अरविंद पुरम, अमल गार्डन, सोरों कटरा, शाहगंज रोड आदि क्षेत्रों में स्थिति खराब है।



















