खांसते, छींकते, हंसते या अचानक जोर लगाने पर अगर पेशाब की कुछ बूंदें अपने आप निकल जाती हैं, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई लोगों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में समस्या इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति सामाजिक गतिविधियों, व्यायाम या लोगों के बीच खुलकर हंसने से भी बचने लगता है।
ऐसा होने की एक प्रमुख वजह स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस हो सकती है। इसमें किसी मानसिक तनाव की बात नहीं होती, बल्कि शरीर पर अचानक पड़ने वाले दबाव के कारण ब्लैडर से पेशाब लीक हो जाती है। यह समस्या महिलाओं में अधिक देखने को मिलती है, हालांकि पुरुष भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
क्या होता है स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस?
स्ट्रेस यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस ऐसी स्थिति है जिसमें पेट के अंदर दबाव बढ़ने पर ब्लैडर पेशाब को रोक नहीं पाता। छींकने, खांसने, हंसने, दौड़ने, सीढ़ियां चढ़ने या भारी सामान उठाने जैसी गतिविधियों के दौरान पेट और ब्लैडर पर अचानक दबाव पड़ता है।
सामान्य स्थिति में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां और यूरेथ्रा के आसपास मौजूद मांसपेशियां पेशाब को बाहर निकलने से रोकती हैं। लेकिन जब ये मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, तो दबाव बढ़ने पर पेशाब की कुछ बूंदें या कभी-कभी इससे अधिक मात्रा में पेशाब बाहर निकल सकती है।
इस समस्या में हर समय पेशाब लीक नहीं होती। कई लोगों में यह सिर्फ छींकने या खांसने जैसी खास परिस्थितियों में होती है, जबकि कुछ लोगों को शारीरिक गतिविधि के दौरान भी परेशानी हो सकती है।
किन परिस्थितियों में लीक हो सकती है पेशाब?
स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस में केवल छींक आने पर ही पेशाब लीक नहीं होती। इसके अलावा कई अन्य स्थितियों में भी ऐसा हो सकता है, जैसे:
- तेज खांसी आने पर
- जोर से हंसने पर
- छींकते समय
- भारी सामान उठाते समय
- अचानक दौड़ने या तेज चलने पर
- नीचे झुकने पर
- कूदने या एक्सरसाइज करने के दौरान
- पेट पर अचानक दबाव पड़ने पर
अगर यह समस्या कभी-कभार नहीं बल्कि लगातार हो रही है, तो इसके कारण का पता लगाना जरूरी है।
पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां क्यों कमजोर होती हैं?
इस समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं। महिलाओं में गर्भावस्था और बच्चे को जन्म देने के बाद पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है। कुछ महिलाओं में डिलीवरी के बाद इन मांसपेशियों की ताकत कम हो जाती है।
इसके अलावा गर्भाशय को हटाने जैसी सर्जरी के बाद भी आसपास के ऊतकों और मांसपेशियों पर असर पड़ सकता है।
पुरुषों में प्रोस्टेट से जुड़ी सर्जरी के बाद पेशाब को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों पर असर पड़ने की संभावना रहती है।
उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की ताकत कम होना भी एक कारण हो सकता है। वहीं अधिक वजन होने पर पेल्विक फ्लोर पर लगातार अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे समस्या बढ़ सकती है।
लंबे समय तक खांसी भी बन सकती है वजह
अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से खांसी रहती है, तो बार-बार खांसने के कारण पेट और पेल्विक एरिया पर लगातार दबाव पड़ सकता है। इससे पेशाब रोकने वाली मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और कुछ लोगों में यूरिन लीकेज की समस्या बढ़ सकती है।
इसी तरह लगातार कब्ज रहने और मल त्याग के दौरान बार-बार ज्यादा जोर लगाने से भी पेल्विक फ्लोर पर दबाव पड़ सकता है।
बहुत अधिक हाई-इंपैक्ट एक्सरसाइज, लगातार दौड़ना या बार-बार कूदने जैसी गतिविधियां भी कुछ लोगों में इस समस्या को बढ़ा सकती हैं।
क्या स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस का इलाज संभव है?
हां, इस समस्या को नियंत्रित करने और कई मामलों में काफी हद तक ठीक करने के लिए उपचार उपलब्ध हैं। सबसे पहले डॉक्टर समस्या का कारण समझने की कोशिश करते हैं और यह देखते हैं कि पेशाब लीक होने के पीछे कोई दूसरी स्वास्थ्य समस्या तो नहीं है।
कुछ लोगों में वजन को नियंत्रित करने, कब्ज का इलाज करने और ब्लैडर पर असर डालने वाली कुछ चीजों का सेवन कम करने से फायदा मिल सकता है। कैफीन वाले पेय और शराब का सेवन कम करने की सलाह कुछ मामलों में दी जा सकती है।
कीगल एक्सरसाइज से मिल सकती है मदद
पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए कीगल एक्सरसाइज उपयोगी हो सकती है। इन एक्सरसाइज का उद्देश्य पेशाब को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों की ताकत बढ़ाना होता है।
हालांकि, कीगल एक्सरसाइज सही तरीके से करना जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति को यह समझ नहीं आ रहा कि एक्सरसाइज कैसे करनी है या समस्या ज्यादा गंभीर है, तो डॉक्टर या पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपिस्ट की मदद ली जा सकती है।
कुछ मामलों में डॉक्टर अन्य नॉन-सर्जिकल उपचार भी सुझा सकते हैं। महिलाओं में कुछ विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है। समस्या गंभीर होने या दूसरे उपचारों से फायदा नहीं मिलने पर डॉक्टर सर्जिकल विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर कभी-कभार छींकने पर एक-दो बूंद पेशाब निकल जाए तो भी इसे बार-बार होने पर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर जब यह समस्या रोजाना होने लगे, कपड़े गीले होने लगें या इसकी वजह से व्यक्ति अपनी सामान्य गतिविधियां कम करने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
अगर पेशाब लीक होने के साथ पेशाब करते समय जलन, दर्द, खून आना, बुखार, अचानक बहुत ज्यादा पेशाब लगना या पेशाब करने में परेशानी जैसे लक्षण भी मौजूद हों, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है। ऐसे लक्षण किसी दूसरी समस्या की ओर भी इशारा कर सकते हैं।
ध्यान रखें
खांसने, छींकने या हंसने पर पेशाब लीक होना शर्मिंदगी की बात नहीं है। यह एक आम स्वास्थ्य समस्या हो सकती है और इसके लिए कई उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। समस्या को छिपाने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से सही कारण पता चल सकता है और उचित उपचार शुरू किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह का विकल्प न मानें। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर योग्य चिकित्सक से जांच और सलाह जरूर लें।


















