ब्लड ग्रुप की बात आते ही आमतौर पर A, B, AB और O का नाम सामने आता है। लेकिन इंसानी रक्त की संरचना इससे कहीं ज्यादा जटिल है। वैज्ञानिकों ने अब एक ऐसे नए ब्लड ग्रुप सिस्टम की पहचान की है, जिसे JAMA नाम दिया गया है। इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन (ISBT) ने इसे मानव रक्त के 49वें ब्लड ग्रुप सिस्टम के रूप में मान्यता दी है।
इस नई खोज से दुर्लभ ब्लड ग्रुप वाले मरीजों की पहचान और सुरक्षित तरीके से ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराने में मदद मिल सकती है।
एक महिला के ब्लड टेस्ट से शुरू हुई जांच
JAMA सिस्टम की पहचान ब्रिटेन और इजराइल के वैज्ञानिकों की टीम ने की। इस खोज की शुरुआत एक इजराइली महिला मरीज के रक्त की जांच के दौरान हुई। जांच में उसके शरीर में एक ऐसा एंटीबॉडी पाया गया, जो अधिकांश लोगों की लाल रक्त कोशिकाओं के साथ प्रतिक्रिया कर रहा था।
हालांकि, महिला और उसके भाई की लाल रक्त कोशिकाओं पर इस एंटीबॉडी का कोई वैसा रिएक्शन नहीं हुआ। वैज्ञानिकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण संकेत था, क्योंकि यह एंटीबॉडी पहले से ज्ञात ब्लड ग्रुप एंटीजन से मेल नहीं खा रहा था।
इसके बाद शोधकर्ताओं ने इस असामान्य स्थिति के पीछे की वजह पता करने के लिए विस्तृत जांच शुरू की।
DNA जांच में सामने आया खास बदलाव
वैज्ञानिकों ने महिला और उसके भाई की आनुवंशिक जांच भी की। इसमें F11R जीन में एक विशेष बदलाव पाया गया। यह जीन शरीर में JAM-A प्रोटीन बनाने से जुड़ा है।
आगे की जांच से पता चला कि JAM-A प्रोटीन सामान्य तौर पर लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर मौजूद रहता है। लेकिन इन दोनों भाई-बहन में इस प्रोटीन से संबंधित आनुवंशिक बदलाव के कारण स्थिति अलग थी।
इसी अंतर ने वैज्ञानिकों को नए ब्लड ग्रुप सिस्टम की पहचान तक पहुंचाया।
JAMA क्या है?
JAMA को A, B, AB या O की तरह एक अकेला सामान्य ब्लड ग्रुप समझना सही नहीं है। यह दरअसल एक अलग ब्लड ग्रुप सिस्टम है, जिसमें एक विशिष्ट एंटीजन की भूमिका होती है।
अधिकांश लोगों की लाल रक्त कोशिकाओं पर यह एंटीजन मौजूद होता है। वहीं, अध्ययन में शामिल महिला और उसके भाई की लाल रक्त कोशिकाओं पर यह एंटीजन नहीं पाया गया। इसी वजह से उनके शरीर में इससे संबंधित एंटीबॉडी मौजूद होने का पता चला।
ब्लड ट्रांसफ्यूजन में क्या होगा फायदा?
इस खोज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जुड़ा है। किसी व्यक्ति के शरीर में मौजूद एंटीबॉडी अगर चढ़ाए जा रहे रक्त की लाल रक्त कोशिकाओं पर मौजूद किसी एंटीजन से प्रतिक्रिया करती है, तो ट्रांसफ्यूजन के दौरान समस्या पैदा हो सकती है।
ऐसे दुर्लभ मामलों में मरीज के ब्लड ग्रुप की सही पहचान बेहद जरूरी होती है। JAMA सिस्टम की जानकारी डॉक्टरों और ब्लड बैंकों को ऐसे मरीजों के लिए उपयुक्त रक्त की पहचान करने में मदद कर सकती है।
खास तौर पर उन मरीजों में इसका महत्व अधिक हो सकता है, जिनमें सामान्य ब्लड ग्रुप जांच के बावजूद ट्रांसफ्यूजन से जुड़ी असामान्य प्रतिक्रिया का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता।
इंसानी ब्लड ग्रुप कितने जटिल हैं, इसका उदाहरण
JAMA की पहचान यह भी दिखाती है कि इंसानी रक्त की संरचना सिर्फ A, B, AB और O तक सीमित नहीं है। लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर कई तरह के एंटीजन मौजूद होते हैं, जिनमें छोटे-छोटे आनुवंशिक अंतर भी ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
नए ब्लड ग्रुप सिस्टम की पहचान से दुर्लभ रक्त संबंधी मामलों को समझने और मरीजों के लिए अधिक सुरक्षित ट्रांसफ्यूजन व्यवस्था विकसित करने में वैज्ञानिकों को मदद मिल सकती है। अब JAMA को 49वें ब्लड ग्रुप सिस्टम के तौर पर मान्यता मिलने के बाद इस क्षेत्र में आगे की रिसर्च का रास्ता भी खुला है।



















