एमओयू पर साइन करते एनटीपीसी के अधिकारी अमित कुलश्रेष्ठ व मेरठ मेयर हरिकांत अहलूवालिया
मेरठवासियों की सबसे बड़ी समस्या यहां वहां फैला कचरा और गंदगी। इस कचरे से NTPC निजात दिलाएगा। दरअसल मेरठ नगर निगम का NTPC के साथ कूड़ा निस्तारण के लिए अनुबंध हुआ है। जिसमें अगले 25 साल तक एनटीपीसी शहर के कचरे से चारकोल ब्रिक्स बनाएगा। इन ब्रिक्स से बिजल
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18 महीनों में बनकर तैयार होगा प्लांट
मेरठ के परीक्षितगढ़ रोड के गांवड़ी गांव में एनटीपीसी का कूड़ा निस्तारण प्लांट (वेस्ट टू चारकोल प्लांट अधिष्ठापन ) लगने जा रहा है। गुरुवार को नवरात्र के पहले दिन मेयर हरिकांत अहलूवालिया, नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने एनटीपीसी के जएीम अमित कुलश्रेष्ठ साथ एमओयू साइन किया है। नगर निगम और एनटीपीसी के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। जल्द एनटीपीसी गांवड़ी में फ्रेश कूड़े से कोयला बनाने का काम शुरू करेगा। पहले एनटीपीसी यहां वेस्ट टू कोल का प्लांट लगाएगा। 18 महीने में ये प्लांट बनकर तैयार होगा। इसके बाद उसकी फंग्शनिंग शुरू होगी।
कूड़े से कोयला उससे बनेगी बिजली
एनटीपीसी के अधिकारी अमित कुलश्रेष्ठ ने दी जानकारी
300 करोड़ रुपए की लागत से गांवड़ी में यह कूड़ा निस्तारण प्लांट लगेगा। एनटीपीसी इस प्रोजेक्ट में शहर से रोजाना निकलने वाले ताजे कूड़े से कोयला बनाएगी। यह कोयला एनटीपीसी के पावर प्लांट्स में जाएगा। जहां इन कोल ब्रिक्स से एनटीपीसी बिजली बनाएगा। कूड़े से चारकोल भी बनेगा। इस प्लांट से रोजाना 900 मैट्रिक टन कूड़े का निस्तारण किया जाएगा। हालांकि मेरठ में रोजाना 1200 मैट्रिक टन कूड़ा निकलता है। अगर 900 मैट्रिक टन कूड़े का निस्तारण हो भी जाए तो भी 300 मैट्रि टन कूड़ा रोजाना निस्तारित होने से बचेगा।
25 साल के लिए हुआ एमओयू
मेरठ महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने कहा नवरात्र के दिन मिली बड़ी सौगात
गांवड़ी में नगर निगम एनटीपीसी को 15 एकड़ जमीन 30 साल की लीज पर देगा, जिसके एवज में करीब 60 हजार रुपये सालाना शुल्क मिलेगा। दोनों के बीच 25 साल का एमओयू हुआ है। निगम द्वारा बाउन्ड्रीवाल, ग्राउंड लैवलिंग, एप्रोच रोड, जल प्रबंधन व राज्य सरकार से अनुदान दिलाने में निगम सहयोग करेगा। एनटीपीसी 10 एकड़ जमीन पर प्लांट और पांच एकड़ जमीन पर ग्रीन बेल्ट बनाएगा। कूड़ा निस्तारणमें निगम से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। नगर निगम रोजाना 720 से 900 मीट्रिक टन कचरा एनटीपीसी को देगा। कचरे के निस्तारण से बनने वाले हर प्रोडक्ट, बॉयप्रोडक्ट की फर्स्ट अथॉरिटी एनटीपीसी होगा। उसे बेचने का हर स्वामित्व केवल एनटीपीसी पर होगा।
यूपी में NTPC का यह चौथा प्लांट
प्लांट की जानकारी देती नगरायुक्त सौरभ गंगवार
मेरठ से पहले एनटीपीसी वाराणसी,नोएडा और गोरखपुर में कूड़े से कोयला बनाने का ये प्लांट लगा चुका है। मेरठ चौथा शहर है जहां ये प्लांट लग रहा है। इन शहरों में ये प्लांट काफी सफल रहा है। मेरठ में नोएडा जितना बड़ा ही प्लांट लगाया जा रहा है। इस प्लांट में नगर निगम के जरिए गीला-सूखा कचरा अलग-अलग भेजा जाएगा। नाले की सिल्ट, मलबा व ईंट रोड़े की छंटनी करनी होगी, जोकि कचरे में शामिल नहीं होगी। एनटीपीसी इस कचरे को सेग्रीगेट करेगा फिर इससे चारकोल ब्रिक्स बनाए जाएंगे। शहर में चारों तरफ बस कूड़ा ही कूड़ा दस साल में शहर के बाहरी इलाके लोहियानगर, गांवड़ी और मंगतपुरम में कूड़े के पहाड़ लग गए। वैज्ञानिक पद्धति से कूड़ा निस्तारण करने में नगर निगम फेल है। महानगर का कचरा फिलहाल नगर निगम लोहियानगर में डाल रहा है। 10 साल से वैज्ञानिक पद्धति से कूड़े को निस्तारण करने का प्लांट नहीं होने के कारण मंगतपुरम और लोहियानगर में कूड़े का पहाड़ खड़ा हो गया है।
लोहियानगर के प्लांट की बढ़ाएंगे क्षमता महापौर हरिकांत अहूवालिया के अनुसार शहर लंबे समय से कूड़े से जूझ रहा है। इसका सही मैनेजमेंट जरूरी है। आज नवरात्र के दिन एनटीपीसी से हमारा करार हुआ है। वो जल्द अपना काम शुरू करेंगे। नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने कहा इस प्लांट से फ्रेश वेस्ट का निस्तारण होगा, हम लोहियानगर कूड़ा निस्तारण प्लांट की क्षमता 300 से बढ़ाकर 600 मीट्रिक टन करने जा रहें हैं, ताकि कूड़े के पहाड़ खत्म होने पर भी काम हो।



















