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लो-रिस्क होने के बावजूद हार्ट अटैक! भारतीयों पर क्यों असरदार नहीं विदेशी मेडिकल फॉर्मूले?

JANVEENA by JANVEENA
April 10, 2026
in स्वास्थ्य
0
लो-रिस्क होने के बावजूद हार्ट अटैक! भारतीयों पर क्यों असरदार नहीं विदेशी मेडिकल फॉर्मूले?

भारत में दिल की बीमारियों को लेकर एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। हालिया अध्ययन के मुताबिक, बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी Heart Attack का शिकार हो रहे हैं, जिन्हें पहले “लो-रिस्क” माना गया था।

दिल्ली के GB Pant Hospital में किए गए इस अध्ययन में 5,000 से ज्यादा मरीजों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि पहली बार हार्ट अटैक झेलने वाले करीब 80% मरीजों को पहले हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा ही नहीं गया था।

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क्यों फेल हो रहे ग्लोबल मॉडल?
डॉक्टर आमतौर पर जिन इंटरनेशनल रिस्क कैलकुलेटर्स का इस्तेमाल करते हैं, वे भारतीयों के जोखिम को सही तरीके से पहचान नहीं पा रहे हैं। इन मॉडलों के अनुसार सिर्फ 11% से 20% मरीजों को ही हाई-रिस्क माना गया, जबकि बाद में सभी को हार्ट अटैक हुआ।

भारतीयों में अलग पैटर्न
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय मरीजों में दिल की बीमारी का पैटर्न पश्चिमी देशों से अलग है। यहां कम उम्र में ही जोखिम बढ़ जाता है। स्टडी में मरीजों की औसत उम्र करीब 54 साल पाई गई, जो चिंता का विषय है।

भारतीयों में एक खास “साउथ एशियन फेनोटाइप” देखा जाता है, जिसमें सामान्य वजन के बावजूद Diabetes और Insulin Resistance का खतरा रहता है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल पैटर्न भी अलग होता है—HDL Cholesterol कम और ट्राइग्लिसराइड्स ज्यादा, जबकि LDL Cholesterol हमेशा अधिक नहीं होता।

छिपे हुए खतरे भी जिम्मेदार
कई लोगों में पेट के आसपास छिपी चर्बी (सेंट्रल ओबेसिटी) होती है, जो सामान्य BMI में नजर नहीं आती। इसके अलावा स्मोकिंग, तनाव और लाइफस्टाइल फैक्टर्स भी जोखिम बढ़ाते हैं।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये ग्लोबल मॉडल कुछ अहम फैक्टर्स को शामिल ही नहीं करते, जैसे लिपोप्रोटीन(a), ApoB, इंसुलिन रेसिस्टेंस और Chronic Kidney Disease। इसी वजह से असली खतरा छिपा रह जाता है और इलाज देर से शुरू होता है।

क्या है समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए अलग रिस्क कैलकुलेटर विकसित करना जरूरी है, जो यहां के लोगों के शरीर और लाइफस्टाइल के अनुसार सटीक आकलन कर सके।

Disclaimer:
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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