बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ हाल ही में मुंबई में गणेश चतुर्थी के एक कार्यक्रम में पति विक्की कौशल और बेटे के साथ नजर आईं। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी और हाल की तस्वीरों को जोड़कर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। खास तौर पर प्रेग्नेंसी के पहले और बाद में उनके शरीर में आए बदलावों को लेकर लोगों ने टिप्पणियां कीं।
यह पहली बार नहीं है जब किसी अभिनेत्री के शरीर में आए प्राकृतिक बदलावों को सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनाया गया हो। इससे पहले ऐश्वर्या राय बच्चन की बॉडी को लेकर भी सार्वजनिक रूप से टिप्पणियां सामने आई थीं। ऐसे मामलों ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—समाज किसी व्यक्ति के शरीर के आकार को लेकर इतनी जल्दी राय क्यों बनाने लगता है?
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मोटापे को लेकर नकारात्मक सोच को क्या कहते हैं?
किसी व्यक्ति को उसके शरीर के वजन या आकार के आधार पर कमतर समझना वेट स्टिग्मा या फैटफोबिया जैसे शब्दों से वर्णित किया जाता है। इसमें केवल व्यक्तिगत टिप्पणियां ही शामिल नहीं होतीं, बल्कि ऐसी सामाजिक धारणाएं भी आती हैं जिनमें अधिक वजन वाले लोगों को आलसी, कम अनुशासित या कम आकर्षक मान लिया जाता है।
भारतीय फिल्मों में भी लंबे समय से अधिक वजन वाले किरदारों को हास्य या मजाक से जोड़कर दिखाने की प्रवृत्ति पर सवाल उठते रहे हैं। 2025 में मलयालम सिनेमा को लेकर प्रकाशित एक शोध में भी इस बात का अध्ययन किया गया कि फिल्मों में बड़े शरीर वाले किरदारों को हास्य के माध्यम के तौर पर दिखाने से सामाजिक धारणाओं पर किस तरह असर पड़ सकता है।
भारत में वजन को लेकर मानसिक दबाव
वजन को लेकर सामाजिक दबाव का असर केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। भारत में बैरिएट्रिक सर्जरी की तैयारी कर रहे लोगों पर हुए शोध में आंतरिक रूप से वजन को लेकर नकारात्मक भावनाओं की व्यापकता दर्ज की गई।
शोध में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने अपने वजन के कारण मानसिक दबाव महसूस करने की बात बताई। कुछ प्रतिभागियों ने यह भी माना कि वजन कम किए बिना उनकी सामाजिक जिंदगी या आत्मसम्मान प्रभावित रहता है।
इन आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि लगातार होने वाली बॉडी शेमिंग व्यक्ति की खुद के शरीर को लेकर धारणा को भी प्रभावित कर सकती है।
बचपन से शुरू हो सकती है बॉडी शेमिंग
वजन को लेकर मजाक और टिप्पणियां कई बार बचपन से ही शुरू हो जाती हैं। स्कूल में साथियों की टिप्पणियां, परिवार की अपेक्षाएं और बाद में सोशल मीडिया का दबाव किसी व्यक्ति के शरीर को लेकर असुरक्षा बढ़ा सकता है।
वजन से जुड़ी बुलिंग का असर वयस्क जीवन में भी दिखाई दे सकता है। कार्यस्थल पर वजन को लेकर मजाक या बार-बार की जाने वाली टिप्पणियों को मनोवैज्ञानिक तनाव से जोड़कर भी शोध किया गया है।
नौकरी और समाज में भी दिखता है असर
वजन से जुड़ा भेदभाव केवल व्यक्तिगत रिश्तों तक सीमित नहीं है। विभिन्न अध्ययनों में नौकरी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े शरीर वाले लोगों के साथ अलग व्यवहार की संभावना पर चर्चा की गई है।
इस तरह के व्यवहार का असर व्यक्ति के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। खासकर तब, जब किसी व्यक्ति को बार-बार यह महसूस कराया जाए कि उसकी पहचान उसके शरीर के आकार से तय होती है।
डॉक्टर के पास जाने में भी हो सकता है डर
स्वास्थ्य सेवाओं में वजन को लेकर पूर्वाग्रह एक महत्वपूर्ण मुद्दा माना जाता है। कुछ लोगों को डर रहता है कि डॉक्टर उनकी हर समस्या को केवल वजन से जोड़ देंगे या उन्हें जज किया जाएगा।
ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति जांच या इलाज में देरी कर सकता है। इसलिए विशेषज्ञों के बीच इस बात पर जोर दिया जाता है कि मरीज के वजन के साथ-साथ उसकी वास्तविक स्वास्थ्य समस्या, मेडिकल हिस्ट्री और जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाए।
क्या ‘हेल्थ एट एवरी साइज’ का मतलब मोटापा स्वस्थ मानना है?
Health at Every Size (HAES) एक ऐसा दृष्टिकोण है जिसमें स्वास्थ्य को केवल वजन या शरीर के आकार से परिभाषित करने के बजाय व्यक्ति की पूरी सेहत, व्यवहार और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान देने की बात की जाती है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि शरीर का वजन स्वास्थ्य के लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं होता। मोटापा कई स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। लेकिन वजन को लेकर शर्मिंदा करना या किसी व्यक्ति की पूरी पहचान को उसके शरीर के आकार तक सीमित कर देना स्वास्थ्य सुधार का प्रभावी तरीका नहीं माना जाता।
मोटापे से ज्यादा जरूरी है नजरिया बदलना
एक ऐसी दुनिया की कल्पना की जा सकती है जहां किसी महिला के प्रसव के बाद उसके शरीर में आए बदलावों को सार्वजनिक बहस का विषय न बनाया जाए। जहां किसी व्यक्ति की प्लेट देखकर उसके चरित्र या अनुशासन पर फैसला न सुनाया जाए और जहां बच्चे स्कूल में अपने शरीर के कारण मजाक का निशाना न बनें।
यही वजह है कि दुनियाभर में वेट स्टिग्मा और बॉडी शेमिंग के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। मकसद वजन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को नजरअंदाज करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सम्मान—दोनों को साथ लेकर चलना है।
डिस्क्लेमर: यह लेख वजन से जुड़े सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं की सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी व्यक्ति के लिए वजन, डाइट या उपचार से जुड़ा फैसला उसकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति और योग्य चिकित्सक की सलाह के आधार पर होना चाहिए।



















