नई दिल्ली: कैंसर की रोकथाम को लेकर सामने आई एक वैश्विक रिसर्च में संक्रमण और कैंसर के बीच संबंध को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। द लैंसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, भारत में 2024 के दौरान करीब 1.9 लाख नए कैंसर मामलों को ऐसे संक्रमणों से जोड़ा गया, जिनका कुछ विशेष प्रकार के कैंसर के साथ वैज्ञानिक संबंध स्थापित है। यह उस वर्ष भारत में सामने आए कुल नए कैंसर मामलों का लगभग 12 प्रतिशत है।
रिसर्च में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संक्रमण से जुड़े कैंसर के मामलों का आकलन किया गया है। अध्ययन के मुताबिक कुछ वायरस और बैक्टीरिया लंबे समय तक शरीर में संक्रमण बनाए रखने पर कुछ प्रकार के कैंसर के खतरे से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे में संक्रमण की रोकथाम, समय पर पहचान और उचित इलाज कैंसर के कुछ मामलों को रोकने में भूमिका निभा सकते हैं।
भारत में 2024 में 15.6 लाख नए कैंसर मामले
अध्ययन में इस्तेमाल किए गए अनुमान के अनुसार, भारत में 2024 के दौरान करीब 15,62,581 नए कैंसर मामले सामने आए। इसी अवधि में कैंसर से लगभग 9,08,828 मौतों का अनुमान लगाया गया।
इन कुल मामलों में करीब 1.9 लाख मामले ऐसे थे, जिनका संबंध कुछ कैंसर पैदा करने वाले संक्रमणों से बताया गया है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को संक्रमण होने पर उसे कैंसर होना तय है। अध्ययन उन संक्रमणों पर केंद्रित है, जिनका कुछ विशेष कैंसर के साथ स्थापित वैज्ञानिक संबंध है।
HPV भारत में प्रमुख संक्रमण-संबंधित कारण
भारत में संक्रमण से जुड़े कैंसर के मामलों में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) का योगदान प्रमुख बताया गया है। रिसर्च के अनुसार HPV से संबंधित मामलों की संख्या एक लाख से अधिक थी।
HPV का सबसे महत्वपूर्ण संबंध सर्वाइकल कैंसर से माना जाता है। लगातार हाई-रिस्क HPV संक्रमण सर्वाइकल कैंसर के विकास में प्रमुख भूमिका निभाता है। HPV संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि सर्वाइकल कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग बीमारी को शुरुआती चरण में पहचानने में मदद कर सकती है।
H. pylori से जुड़े करीब 47 हजार मामले
अध्ययन में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (H. pylori) संक्रमण को भी भारत में संक्रमण-संबंधित कैंसर के महत्वपूर्ण कारणों में शामिल किया गया है। अनुमान के मुताबिक भारत में करीब 47 हजार कैंसर मामलों का संबंध इस बैक्टीरिया से था।
H. pylori मुख्य रूप से पेट में संक्रमण पैदा करता है और लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण पेट के कैंसर के खतरे से जुड़ा हुआ है। वैश्विक स्तर पर भी यह संक्रमण कैंसर के महत्वपूर्ण कारणों में शामिल रहा।
EBV और हेपेटाइटिस वायरस से जुड़े मामले
रिसर्च के मुताबिक भारत में एपस्टीन-बार वायरस (EBV) से करीब 22 हजार कैंसर मामले जुड़े थे। वहीं हेपेटाइटिस-B वायरस से लगभग 10 हजार और हेपेटाइटिस-C वायरस से करीब 5,300 मामलों का संबंध बताया गया।
हेपेटाइटिस-B और C संक्रमण लंबे समय तक बने रहने पर लिवर कैंसर के खतरे से जुड़े हैं। दूसरी ओर, EBV का संबंध कई प्रकार के कैंसर से पाया गया है। संक्रमण और कैंसर के बीच संबंध संक्रमण के प्रकार और कैंसर के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
दुनिया में करीब 23 लाख कैंसर मामले संक्रमण से जुड़े
वैश्विक आंकड़ों पर नजर डालें तो अध्ययन के अनुसार 2024 में करीब 23 लाख नए कैंसर मामले संक्रमण से जुड़े थे। यह दुनिया भर में सामने आए कुल नए कैंसर मामलों का लगभग 12 प्रतिशत था।
रिसर्च में 12 अलग-अलग रोगजनकों का विश्लेषण किया गया। इनमें H. pylori, HPV, हेपेटाइटिस-B वायरस, EBV और हेपेटाइटिस-C वायरस संक्रमण से जुड़े कैंसर के मामलों में प्रमुख योगदान देने वाले कारकों के रूप में सामने आए।
अनुमान के मुताबिक वैश्विक स्तर पर H. pylori से करीब 7.6 लाख, HPV से लगभग 7.5 लाख, हेपेटाइटिस-B से 3.6 लाख, EBV से 2.6 लाख और हेपेटाइटिस-C से करीब 1.6 लाख कैंसर मामले जुड़े थे।
कम और मध्यम आय वाले देशों में ज्यादा बोझ
स्टडी में संक्रमण से जुड़े कैंसर के भौगोलिक वितरण में भी बड़ा अंतर सामने आया। अनुमान के मुताबिक ऐसे कैंसर के करीब 77 प्रतिशत मामले कम और मध्यम आय वाले देशों में पाए गए।
पूर्वी एशिया में संक्रमण से संबंधित कैंसर का बोझ सबसे अधिक रहा, जहां करीब 9.9 लाख मामले दर्ज किए गए। यह दुनिया भर में संक्रमण से जुड़े कुल मामलों का लगभग 42 प्रतिशत था।
रोकथाम से कम हो सकते हैं कुछ कैंसर के मामले
इस रिसर्च से यह संकेत मिलता है कि कुछ संक्रमणों की रोकथाम कैंसर नियंत्रण की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। टीकाकरण, सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवहार, समय पर जांच और जरूरी संक्रमणों का उपचार कुछ संक्रमण-संबंधित कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, कैंसर कई कारणों से होने वाली जटिल बीमारी है। इसलिए किसी व्यक्ति के कैंसर के जोखिम का आकलन केवल संक्रमण के आधार पर नहीं किया जा सकता।


















