इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) आज वजन घटाने और फिट रहने का एक लोकप्रिय तरीका बन चुका है। खासकर 16:8 फास्टिंग, जिसमें 16 घंटे उपवास और 8 घंटे के भीतर भोजन किया जाता है, बड़ी संख्या में लोग अपना रहे हैं। हालांकि, हाल ही में सामने आए एक शोध ने इस खानपान पद्धति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
रिसर्च में क्या सामने आया?
20 हजार से अधिक लोगों के आंकड़ों पर आधारित एक विश्लेषण में पाया गया कि जो लोग रोजाना केवल 8 घंटे या उससे कम समय की विंडो में भोजन करते हैं, उनमें हृदय संबंधी बीमारियों से मृत्यु का जोखिम अधिक देखा गया। कुछ मामलों में यह जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में काफी ज्यादा दर्ज किया गया। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इंटरमिटेंट फास्टिंग हर व्यक्ति के लिए हानिकारक है, लेकिन इसके लंबे समय तक प्रभावों पर और अध्ययन की जरूरत है।
विशेषज्ञ क्यों बरतने की सलाह दे रहे हैं सावधानी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक खाली पेट रहने से शरीर में कई जैविक बदलाव होते हैं। इससे ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव, तनाव से जुड़े हार्मोन में वृद्धि और वसा के मेटाबॉलिज्म में परिवर्तन हो सकता है। ये बदलाव कुछ लोगों में हृदय पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि लंबे समय तक भोजन न करने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और हार्मोन का संतुलन प्रभावित हो सकता है, जिससे कुछ लोगों में दिल की धड़कन अनियमित होने की संभावना बढ़ सकती है।
पानी की कमी भी बन सकती है समस्या
इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान कई लोग पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते। इससे शरीर में डिहाइड्रेशन और पोटैशियम व मैग्नीशियम जैसे जरूरी खनिजों की कमी हो सकती है। ये दोनों खनिज हृदय की सामान्य कार्यप्रणाली और धड़कन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है?
यदि किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं, तो बिना डॉक्टर की सलाह के इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू नहीं करनी चाहिए। जो लोग नियमित रूप से दवाइयां लेते हैं, उनके लिए भी खानपान का समय बदलना जोखिम पैदा कर सकता है।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
यदि फास्टिंग के दौरान बार-बार कमजोरी, चक्कर आना, अत्यधिक थकान, सीने में असहजता, दिल की धड़कन तेज होना या चिड़चिड़ापन महसूस हो, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण बताते हैं कि शरीर इस तरीके के अनुरूप प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है।
संतुलित तरीका ही सबसे बेहतर
विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग हर व्यक्ति के लिए एक जैसा लाभदायक नहीं होती। इसे अपनाने से पहले अपनी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, जीवनशैली और चिकित्सकीय सलाह को ध्यान में रखना जरूरी है। स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद किसी भी डाइट प्लान से अधिक महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और उपलब्ध शोधों पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न समझें। यदि आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है या आप किसी विशेष डाइट को अपनाना चाहते हैं, तो पहले डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।



















