मेडिकल साइंस तेजी से ऐसी दिशा में आगे बढ़ रही है, जहां गंभीर बीमारियों का पता बेहद शुरुआती चरण में लगाया जा सके। इसी कड़ी में University of California Los Angeles के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है, जो साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए कई बीमारियों, खासकर Cancer की पहचान करने में मदद कर सकती है।
यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल Proceedings of the National Academy of Sciences में प्रकाशित हुआ है। इसमें बताया गया है कि एक ही ब्लड सैंपल से शरीर की समग्र स्थिति का आकलन किया जा सकता है, जिससे समय रहते बीमारी पकड़ने में मदद मिलेगी।
इस नई तकनीक को MethylScan नाम दिया गया है। यह खून में मौजूद डीएनए के छोटे-छोटे टुकड़ों का विश्लेषण करती है। जब शरीर की कोशिकाएं टूटती हैं, तो वे अपनी आनुवंशिक जानकारी खून में छोड़ती हैं। यह टेस्ट डीएनए में मौजूद “मिथाइलेशन पैटर्न” को पढ़कर यह पहचानने की कोशिश करता है कि कोशिकाएं स्वस्थ हैं या बीमार।
ब्लड टेस्टिंग में सबसे बड़ी चुनौती ‘बैकग्राउंड नॉइज’ होती है, यानी खून में मौजूद सामान्य डीएनए के बीच बीमारी से जुड़े संकेतों को ढूंढना। इस समस्या को हल करने के लिए वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की, जो गैर-जरूरी डीएनए को हटाकर केवल महत्वपूर्ण संकेतों पर फोकस करती है। इससे टेस्ट की सटीकता बढ़ती है और लागत भी कम होती है।
इस अध्ययन में 1000 से ज्यादा लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें कैंसर मरीज, लिवर बीमारी से पीड़ित और स्वस्थ लोग शामिल थे। नतीजों में यह सामने आया कि यह टेस्ट लगभग 63 प्रतिशत कैंसर मामलों की पहचान करने में सफल रहा। शुरुआती स्टेज के आधे से ज्यादा मामलों को भी यह पकड़ सका। खासकर लिवर कैंसर के हाई-रिस्क मरीजों में इसकी पहचान दर करीब 80 प्रतिशत तक रही।
इस तकनीक की एक और खासियत यह है कि यह यह भी संकेत दे सकती है कि शरीर का कौन सा अंग प्रभावित है, जिससे डॉक्टरों को आगे की जांच में आसानी होती है। हालांकि, अभी यह तकनीक शुरुआती चरण में है और इसे आम उपयोग में लाने से पहले बड़े स्तर पर और परीक्षण की आवश्यकता है।
डिस्क्लेमर:
यह जानकारी शोध और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सा सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी जांच या उपचार से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।



















