केरल हाईकोर्ट में कैंसर की महंगी दवा को किफायती दर पर उपलब्ध कराने से जुड़ी एक याचिका लंबे समय तक लंबित रहने के बाद चर्चा का विषय बन गई है। मामले में याचिकाकर्ता महिला की सुनवाई पूरी होने से पहले ही मृत्यु हो गई, लेकिन अदालत ने इसे व्यापक जनहित का मामला मानते हुए इसकी सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया है।
यह याचिका जून 2022 में दायर की गई थी। इसमें स्तन कैंसर (ब्रेस्ट कैंसर) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रिबोसिक्लिब (Ribociclib) दवा को आम मरीजों की पहुंच में लाने के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई थी। जनवरी 2023 से अब तक इस मामले को अंतिम सुनवाई के लिए 57 बार सूचीबद्ध किया गया, लेकिन किसी भी तारीख पर अंतिम बहस पूरी नहीं हो सकी।
याचिका में केंद्र सरकार से पेटेंट अधिनियम, 1970 की धारा 100 के तहत गवर्नमेंट यूज लाइसेंस जारी करने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि ऐसा होने पर इस दवा का जेनेरिक संस्करण भारत में तैयार किया जा सकेगा, जिससे इसकी कीमत में 90 से 95 प्रतिशत तक कमी आ सकती है और अधिक मरीजों को इसका लाभ मिलेगा।
मामले में बताया गया कि फिलहाल रिबोसिक्लिब की मासिक लागत लगभग 78,400 रुपये है, जबकि इसी श्रेणी की दूसरी दवा एबेमासिक्लिब (Abemaciclib) की कीमत करीब 47,700 रुपये से 95,500 रुपये प्रति माह तक है। इन ऊंची कीमतों के कारण कई मरीजों के लिए नियमित इलाज जारी रखना कठिन हो जाता है।
केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि रिबोसिक्लिब प्रभावी दवा है, लेकिन इस मामले में गवर्नमेंट यूज लाइसेंस जारी करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार का तर्क था कि स्तन कैंसर की स्थिति को राष्ट्रीय आपातकाल जैसी श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
वहीं, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य सेवाओं तक उचित पहुंच भी शामिल है। इसलिए जीवनरक्षक दवाओं को किफायती बनाना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
मामले में केंद्र सरकार, दवा निर्माता कंपनियों और अन्य पक्ष अपने-अपने जवाब अदालत में दाखिल कर चुके हैं। अदालत ने एक एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) भी नियुक्त किया है। सभी आवश्यक दस्तावेज और दलीलें प्रस्तुत होने के बावजूद अंतिम फैसला अभी तक नहीं आया है। अब इस मामले में शीघ्र सुनवाई की मांग की जा रही है, ताकि जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और मरीजों के स्वास्थ्य अधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर स्पष्ट निर्णय हो सके।



















