भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच लागू हुए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। इस समझौते का प्रभाव हेल्थकेयर सेक्टर पर भी पड़ सकता है, जिससे ब्रिटेन से आयात होने वाले कुछ मेडिकल उपकरण और विशेष दवाएं पहले की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकती हैं।
भारत यूके से मुख्य रूप से स्पेशलाइज्ड जेनेरिक दवाएं, सर्जिकल उपकरण, डायग्नोस्टिक मशीनें, ईसीजी और एक्स-रे मशीनों सहित कई उन्नत मेडिकल डिवाइस आयात करता है। नई व्यापार व्यवस्था के तहत इन उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, जिन मेडिकल उपकरणों पर पहले लगभग 7.5% से 15% तक कस्टम ड्यूटी लगती थी, उन्हें धीरे-धीरे घटाकर करीब 3% तक लाने की योजना है। वहीं अगले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में ऐसे उत्पादों पर शुल्क पूरी तरह समाप्त किए जाने की भी संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क में कमी आने से आधुनिक मेडिकल उपकरणों की लागत घट सकती है, जिसका लाभ अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और मरीजों को मिल सकता है। हालांकि किसी उत्पाद की अंतिम खुदरा कीमत टैक्स, वितरण लागत, विनिर्माता और बाजार की स्थिति जैसे अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगी।
यह व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक और उत्पादों की उपलब्धता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




















