भारत में सैकड़ों साल की इस्लामिक, ईसाई राजसत्ता की गुलामी फिर 1947 के बाद मुस्लिम तुष्टिकरण नीति के चलते एक हिंदू सनातनी को घोर निराशा होने के बावजूद यह उम्मीद हमेशा बनी रही कि कभी न कभी उनको न्याय मिलेगा और उनके आराध्य प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली पर पुनः भव्य मंदिर बनेगा। परंतु जातियों में बंटे हिंदू धर्म किसी एक सनातनी को ये आशा हमेशा सप्नवत ही लगी कि भारत कभी एक हिन्दू राष्ट्र बनेगा। इस विषय पर समाजसेवी पत्रकार डी पी गुप्ता एडवोकेट ने अपना नजरिया प्रस्तुत करते हुए लिखा है कि सन् 2014 को जबसे नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के नेतृत्व में एक नये भारत का जन्म हुआ तबसे भारत के सनातन हिन्दू भावनाओं को वाजिब सम्मान मिल रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण उपरोक्त फोटो को देख कर ही लग जाता है जिसमें भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य मंत्री पूरी निष्ठा के साथ भगवान राम लला की पूजा कर रहे हैं। उन्हे मुस्लिम तुष्टिकरण करने की कोई परवाह नहीं है और उनकी कार्यशैली ये बता रही है जैसे वर्तमान शासन-सत्ता भारत में हिंदू राष्ट्र की मौखिक घोषणा कर रही है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार कार्यक्रम से मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते जिस तरह दूरी बनायी उससे ठीक उल्टा वर्तमान भारत सरकार सभी धर्मों का यथोचित सम्मान और सबका साथ, सबका विकास की नीति का दृढ़ता पूर्वक पालन करते हुए भी भारतवर्ष के प्राचीन मूल सनातन हिन्दू भावनाओं का पूरी निष्ठा और समर्पण से सम्मान कर रही है जो कि सराहनीय है। श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय के तीन के 35वें श्लोक के द्वितीय चरण में वर्णित है कि “स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।।” अर्थात अपने धर्म में रहने के लिए मृत्यु को भी स्वीकार करना श्रेयष्कर है परन्तु दूसरे धर्म में परिवर्तित होना बहुत ही भयावह है। सनातन मूल्यों के इसी सिद्धांत का पालन करते हुए करोड़ों लोग बलिदान हो गये परन्तु किसी विदेशी धर्म को अंगीकार नहीं किया। एक वक्त था जब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1955 में सऊदी अरब के बादशाह के काशी दौरे के समय रास्ते की सभी मंदिरों और मूर्तियों को कपड़े से ढका दिया था क्योंकि उन्हें लगता था कि इस्लाम में बुतपरस्ती हराम है इसलिए सऊदी का बादशाह कहीं नाराज न हो जाए। इससे उस वक्त हिंदू भावनाओं को बहुत ठेस पहुंची थी परंतु तत्कालीन सरकार ने हिंदू भावनाओं की परवाह नहीं किया था परन्तु आज के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत इतना अधिक सशक्त हो गया है कि उसी अरब की धरती पर हिंदू मंदिर बनवा कर मूर्ति पूजा के जरिए ईश्वर आराधना करने की सर्वश्रेष्ठ पूजा पद्धति को स्थापित कर दिया है। जो अपने आप में अकल्पनीय घटना है।
(ये लेखक के निजी विचार हैं।)


















विचारपरक आलेख। साधुवाद।