पाकिस्तान के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट का पहला सेक्रेटरी जनरल नियुक्त किया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति की घोषणा की है। वह रियाद में स्थापित किए जा रहे इस गठबंधन के जनरल सेक्रेटेरिएट का नेतृत्व करेंगे।
नौमान महमूद की नियुक्ति को समझौते को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तीनों देशों के बीच 7 अगस्त 2026 को मक्का में इस रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
कौन हैं नौमान महमूद?
लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद पाकिस्तानी सेना की बलूच रेजिमेंट से जुड़े रहे हैं। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने वरिष्ठ कमान और रणनीतिक जिम्मेदारियां संभालीं। वह पाकिस्तान के अशांत उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सैन्य कोर की कमान भी संभाल चुके हैं।
इसके अलावा वह इस्लामाबाद स्थित नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं। अब सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें तीन देशों के इस नए रक्षा तंत्र के पहले सेक्रेटरी जनरल की जिम्मेदारी मिली है।
7 अगस्त को हुआ था मक्का रक्षा समझौता
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का में मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का उद्देश्य तीनों देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा, रक्षा सहयोग और संयुक्त प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना है। समझौते में साफ कहा गया है कि किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला बाकी सदस्यों के खिलाफ हमला माना जाएगा।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बाद में इस समझौते को पूरी तरह रक्षात्मक बताते हुए कहा था कि इसका उद्देश्य किसी देश के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई करना नहीं है। सऊदी अधिकारियों ने भी इसे किसी सैन्य धुरी या किसी विशेष देश के खिलाफ गठबंधन के रूप में पेश करने से इनकार किया है।
इस्तांबुल बैठक में तय हुआ था नेतृत्व का ढांचा
समझौते के बाद गठबंधन को स्थायी संस्थागत रूप देने की प्रक्रिया शुरू हुई। तीनों देशों के अधिकारियों की शुरुआती बैठक इस्तांबुल में हुई, जहां संगठन की संरचना और आगे की व्यवस्था पर चर्चा की गई। इसके बाद सेक्रेटरी जनरल का पद पाकिस्तान के हिस्से में आने की व्यवस्था बनी और नौमान महमूद के नाम पर नियुक्ति हुई।
अब रियाद में जनरल सेक्रेटेरिएट स्थापित किया जा रहा है। नौमान महमूद इस कार्यालय के पहले प्रमुख होंगे और तीनों सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग से जुड़ी संस्थागत व्यवस्था को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
NATO के आर्टिकल 5 से क्यों हो रही तुलना?
मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट की सामूहिक रक्षा व्यवस्था की तुलना कई रिपोर्टों में NATO के आर्टिकल 5 से की गई है। इसकी वजह यह है कि दोनों व्यवस्थाओं में एक सदस्य पर हमला होने की स्थिति को व्यापक सामूहिक सुरक्षा के संदर्भ में देखा जाता है।
हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक बयानों के अनुसार मक्का समझौते को तीनों देशों ने सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग के ढांचे के रूप में पेश किया है। सऊदी अधिकारियों ने इसे किसी सैन्य गुट या क्षेत्रीय धुरी के रूप में वर्णित किए जाने से भी इनकार किया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा तनाव के बीच बढ़ी अहमियत
नौमान महमूद की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा परिस्थितियां लगातार चर्चा में हैं। समझौते के बाद तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया है।
अब रियाद में बनने वाला जनरल सेक्रेटेरिएट इस समझौते को एक स्थायी संस्थागत रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नौमान महमूद की नियुक्ति इसी प्रक्रिया का पहला बड़ा कदम है।



















