बारिश और गर्मी के मौसम में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनमें डेंगू भी एक प्रमुख वायरल संक्रमण है। डेंगू होने पर तेज बुखार के साथ सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द तथा त्वचा पर लाल चकत्ते या रैश दिखाई दे सकते हैं।
हालांकि, बुखार और लाल चकत्ते का मतलब हर बार डेंगू नहीं होता। कई अन्य वायरल और संक्रामक बीमारियों में भी इस तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से डेंगू की पुष्टि करना सही नहीं है।
डेंगू में कौन-कौन से लक्षण दिखाई देते हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार डेंगू में अचानक तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतली, उल्टी और त्वचा पर रैश हो सकता है।
लक्षण आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के करीब 4 से 10 दिन बाद शुरू हो सकते हैं। ज्यादातर लोगों में डेंगू हल्के रूप में रहता है और वे कुछ दिनों से लेकर करीब एक-दो सप्ताह के भीतर ठीक हो सकते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में यह गंभीर स्थिति में भी बदल सकता है।
शरीर पर लाल चकत्ते दिखें तो क्या डेंगू है?
डेंगू के दौरान त्वचा पर रैश या लाल चकत्ते दिखाई देना आम लक्षणों में शामिल है। लेकिन केवल त्वचा पर चकत्ते देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि व्यक्ति को डेंगू ही है।
अन्य वायरल संक्रमणों में भी बुखार के साथ रैश हो सकता है। अगर बुखार लगातार बना हुआ है और इसके साथ शरीर में तेज दर्द, सिरदर्द, उल्टी या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर रक्त जांच समेत अन्य जांच के आधार पर डेंगू की पुष्टि कर सकते हैं।
बुखार उतरने के बाद भी रहें सतर्क
डेंगू में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बुखार कम होना हमेशा बीमारी के पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं होता। WHO के अनुसार गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत अक्सर बुखार कम होने के आसपास दिखाई दे सकते हैं।
इनमें तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, अत्यधिक कमजोरी, तेजी से सांस लेना, उल्टी या मल में खून आना तथा त्वचा का ठंडा या पीला पड़ना शामिल हो सकता है।
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर इंतजार करने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
डेंगू का शक हो तो क्या करें?
बुखार के साथ शरीर पर लाल चकत्ते, तेज सिरदर्द या शरीर में दर्द जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। डेंगू के लिए कोई ऐसी विशेष एंटीवायरल दवा नहीं है जो वायरस को सीधे खत्म कर दे। इलाज मुख्य रूप से आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और मरीज की स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय देखभाल पर आधारित होता है।
WHO के अनुसार बुखार और दर्द को नियंत्रित करने के लिए पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि डेंगू में इनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
मच्छरों से बचाव क्यों है जरूरी?
डेंगू से बचने का सबसे प्रभावी तरीका संक्रमित मच्छर के काटने से बचना और मच्छरों की संख्या को नियंत्रित करना है। डेंगू फैलाने वाला Aedes मच्छर दिन में भी सक्रिय रहता है, इसलिए केवल रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है।
बचाव के लिए घर और आसपास जमा पानी को नियमित रूप से हटाएं। पानी की टंकियों और कंटेनरों को ढककर रखें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना और जरूरत के अनुसार मच्छर भगाने वाले उपायों का इस्तेमाल भी मददगार हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को डेंगू हो गया है, तो बीमारी के दौरान उसे मच्छरों से बचाना भी जरूरी है। इससे संक्रमित मच्छर के जरिए वायरस के दूसरे लोगों तक पहुंचने की संभावना कम की जा सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। बुखार, रैश या डेंगू जैसे लक्षण होने पर खुद से बीमारी का निदान या दवा शुरू न करें। गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।



















