हेल्थ डेस्क: अस्पतालों में मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी दुनिया के कई देशों में बढ़ती हिंसा और दुर्व्यवहार का सामना कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बताते हुए कहा है कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है।
WHO की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
WHO के अनुसार, दुनिया भर में हर 10 में से लगभग 4 हेल्थकेयर वर्कर्स अपने पेशेवर जीवन में कम से कम एक बार शारीरिक हिंसा का सामना करते हैं। यदि गाली-गलौज, धमकी, मानसिक उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार जैसे मामलों को भी शामिल किया जाए, तो प्रभावित स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या 60 प्रतिशत से अधिक हो जाती है। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है।
किन देशों में अधिक मामले सामने आए?
एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा केवल विकासशील देशों तक सीमित नहीं है। समीक्षा में जर्मनी, चीन, पेरू, तुर्किये और भारत सहित कई देशों में डॉक्टरों और अन्य हेल्थकेयर वर्कर्स के खिलाफ हिंसा के उच्च स्तर दर्ज किए गए। इसके अलावा जॉर्डन, बुल्गारिया, इटली, पोलैंड और अमेरिका में भी बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने कार्यकाल के दौरान हिंसा झेलने की बात कही।
डॉक्टरों पर हमले क्यों बढ़ रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या, स्वास्थ्यकर्मियों की कमी, लंबे इंतजार, इलाज को लेकर ऊंची अपेक्षाएं और डॉक्टर-मरीज के बीच प्रभावी संवाद की कमी कई बार तनाव पैदा करती है। यही तनाव कुछ मामलों में हिंसक घटनाओं का रूप ले लेता है।
भारत की स्थिति
भारत के कई राज्यों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग कानून लागू हैं, लेकिन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर हमलों की घटनाएं अभी भी सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पूरे देश में एक समान और प्रभावी कानून लागू करने की जरूरत है, ताकि स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।
दूसरे देशों ने क्या कदम उठाए?
कई देशों ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम बनाए हैं। कुछ देशों में डॉक्टरों पर हमला गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है, जबकि कहीं भारी जुर्माने, जेल की सजा और विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। कई स्थानों पर मेडिकल स्टाफ को विवाद की स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए भी बेहद जरूरी है।
नोट: यह जानकारी विभिन्न शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है।



















