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कांगो में इबोला का कहर, 2 हजार से ज्यादा मौतें; सिर्फ 3 हफ्तों में दोगुना हुआ आंकड़ा

JANVEENA by JANVEENA
August 12, 2026
in स्वास्थ्य
0
कांगो में इबोला का कहर, 2 हजार से ज्यादा मौतें; सिर्फ 3 हफ्तों में दोगुना हुआ आंकड़ा

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। संक्रमण तेजी से फैलने के साथ ही इससे मरने वालों की संख्या 2 हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है। सबसे ज्यादा चिंता संक्रमण की रफ्तार को लेकर है, क्योंकि मौतों की संख्या जिस तेजी से बढ़ी है, उसने स्वास्थ्य एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कांगो में अब तक इबोला के 4,381 मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें से 2,011 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 704 मरीज अभी अस्पतालों में भर्ती हैं और उन्हें निगरानी एवं आइसोलेशन में रखा गया है।

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महज तीन हफ्तों में दोगुनी हुई मौतों की संख्या

इस प्रकोप की सबसे गंभीर बात इसकी रफ्तार है। रिपोर्ट के मुताबिक, इबोला संक्रमण से होने वाली मौतों का आंकड़ा 1,000 तक पहुंचने में लगभग 9 सप्ताह लगे थे।

लेकिन इसके बाद तस्वीर तेजी से बदली। अगले 1,000 मौतों का आंकड़ा पार करने में सिर्फ करीब 3 सप्ताह का समय लगा। यानी बेहद कम अवधि में मृतकों की संख्या 1,000 से बढ़कर 2,000 के पार पहुंच गई।

इसी तेज वृद्धि के कारण मौजूदा प्रकोप को इबोला के सबसे तेजी से बढ़ने वाले प्रकोपों में शामिल किया जा रहा है।

Bundibugyo स्ट्रेन ने बढ़ाई चिंता

इस बार सामने आए संक्रमण में Bundibugyo स्ट्रेन का इबोला वायरस पाया गया है। इस स्ट्रेन को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि इसके खिलाफ फिलहाल कोई वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है।

हालांकि, संभावित वैक्सीन और उपचार विकल्पों पर वैज्ञानिक स्तर पर काम जारी है। फिलहाल संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए मरीजों को अलग रखना, संक्रमित लोगों के संपर्क में आए व्यक्तियों की पहचान करना, लगातार निगरानी और बेहतर क्लीनिकल केयर जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है।

मई में सामने आया था प्रकोप

कांगो में मौजूदा इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की गई थी। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक वायरस इससे कई महीने पहले ही फैलना शुरू हो चुका था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, संक्रमण की शुरुआत फरवरी में हुई थी, लेकिन इसकी आधिकारिक पहचान और घोषणा मई में हो सकी। संक्रमण के शुरू होने और आधिकारिक तौर पर प्रकोप घोषित किए जाने के बीच का यह अंतर स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए चिंता का बड़ा कारण है।

देर से पहचान बनी बड़ी चुनौती

इबोला जैसे गंभीर संक्रमण को नियंत्रित करने में शुरुआती पहचान बेहद अहम होती है। किसी संक्रमित व्यक्ति की समय रहते पहचान होने पर उसे तुरंत आइसोलेट किया जा सकता है और उसके संपर्क में आए लोगों की निगरानी शुरू की जा सकती है।

लेकिन अगर संक्रमण का पता काफी देर से चलता है तो वायरस के समुदाय में फैलने की संभावना बढ़ जाती है। कांगो में मौजूदा स्थिति में भी शुरुआती संक्रमण और आधिकारिक घोषणा के बीच कई महीनों का अंतर चिंता का विषय बना हुआ है।

स्वास्थ्य एजेंसियां अब संक्रमण की निगरानी बढ़ाने के साथ संक्रमित लोगों के संपर्कों की पहचान, मरीजों के इलाज और आइसोलेशन तथा जरूरी मेडिकल संसाधनों की उपलब्धता पर काम कर रही हैं।

कांगो में 17वीं बार इबोला का प्रकोप

कांगो में इबोला का मौजूदा प्रकोप देश के इतिहास में 17वां इबोला आउटब्रेक बताया जा रहा है। इबोला वायरस की पहली पहचान साल 1976 में इबोला नदी के आसपास हुई थी।

इसके बाद अफ्रीका के कई हिस्सों में समय-समय पर इस वायरस का संक्रमण सामने आता रहा है। कांगो लंबे समय से इबोला के प्रकोपों से प्रभावित रहा है और मौजूदा स्थिति को अब तक के सबसे गंभीर प्रकोपों में से एक माना जा रहा है।

कैसे फैलता है इबोला?

इबोला संक्रमित व्यक्ति के शरीर के खून या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैल सकता है। मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों और संक्रमित व्यक्ति के करीबी संपर्क में रहने वालों के लिए संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है।

इसी वजह से संक्रमण को रोकने के लिए समय पर पहचान, मरीजों का आइसोलेशन, संपर्क में आए लोगों की निगरानी और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए उचित सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी होते हैं।

फिलहाल कांगो में स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमण की रफ्तार को नियंत्रित करने के लिए निगरानी और मेडिकल इंतजामों को मजबूत करने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में संक्रमण की स्थिति और नए मामलों की संख्या पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों और स्वास्थ्य एजेंसियों से जुड़ी जानकारी पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह न माना जाए। इबोला या किसी संक्रामक बीमारी से जुड़े लक्षण या जोखिम की स्थिति में योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य अधिकारी से सलाह लें।

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